माया कोडनानी को बचा पायेगी शाह की गवाही?

अहमदाबाद | संवाददाता: माया कोडनानी मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की गवाही का क्या कोई लाभ कोडनानी को मिल पायेगा? सोमवार को राजनीतिक हलके में यही सवाल उठता रहा. हालांकि अमित शाह की गवाही का परिणाम जो भी निकले, माया कोडनानी गोधरा दंगों के मामले में पहले ही दोषी ठहराई जा चुकी हैं और उन्हें सज़ा सुनाई जा चुकी है. इस गवाही का नफा-नुकसान केवल इतना भर होगा कि उनकी सज़ा की मियाद और बढ़ सकती है.

गुजरात दंगों को लेकर सोमवार को अमित शाह अदालत पहुंचे और उन्होंने माया कोडनानी के बचाव पक्ष की ओर से गवाही दी. नरोदा गाम में 11 मुसलमानों की हत्या कर दी गई थी. इस मामले में 82 लोगों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है.


अमित शाह ने अपनी गवाही में कहा कि नरोदा गाम दंगों में आरोपी गुजरात की पूर्व मंत्री माया कोडनानी 28 फरवरी 2002 को राज्य विधानसभा में मौजूद थी. शाह ने यह भी कहा कि सुबह माया से उनकी मुलाक़ात सोला सिविल अस्पताल में हुई थी. जहां भीड़ के विरोध के बाद हमें पुलिस ने सुरक्षित निकाला था.

स्त्री रोग विशेषज्ञ माया कोडनानी का परिवार पाकिस्तान से आ कर गुजरात में बसा था. संघ में सक्रिय माया ने 1998 में नरोदा से चुनाव लड़ा और वे विधायक चुनी गईं. 2002 और 2007 में भी उन्हें विधायक चुना गया. हालांकि 2002 के गुजरात दंगों में उनका नाम सामने आया और उनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ.

लेकिन उनकी जीत को देखते हुये नरेंद्र मोदी ने 2007 में उन्हें मंत्री भी बनाया. उन्हें मोदी सरकार में महिला और बाल विकास विभाग की कमान दी गई. नरेंद्र मोदी की विश्वस्त माया के खिलाफ गोधरा दंगों के नेतृत्व का आरोप था. उन्हें इस मामले में गिरफ्तार भी किया गया. लेकिन जमानत पर रिहा होने का बाद भी वे कामकाज करती रहीं. बाद में अदालत में गोधरा दंगों में साबित हुआ और 31 अगस्त 2012 को माया को 28 साल की सज़ा हुई.

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