छत्तीसगढ़ में दवा जांच प्रयोगशाला बदहाल

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में दवाओं की जांच करने वाली ड्रग लेबोरेट्री का हाल बुरा है. पिछले दस सालों में इस दवा परीक्षण प्रयोगशाला में कर्मचारियों की नियुक्ति ही नहीं हो पाई है.

प्रयोगशाला के खस्ताहाल होने का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि इस प्रयोगशाला में कुल 31 पद स्वीकृत हैं लेकिन इनमें से 27 पदों पर नियुक्ति ही नहीं हो पाई है. यहां तक कि दवा परीक्षण प्रयोगशाला के एक पद पर भी संविदा नियुक्ति की गई है.


पिछले सवा साल में इस प्रयोगशाला में केवल 15 दवाओं के नमूनों की जांच की गई है. ये वो दवायें हैं, जिन्हें किसी कारण से अमानक घोषित किया गया है. देश के आंकड़ों को देखें तो पिछले साल भर में बड़ी मात्रा में दवाओं का परीक्षण किये जाने के कारण ही यह तथ्य सामने आया कि बड़ी संख्या में बाज़ार में ऐसी दवायें हैं, जो बीमार को ठीक करने के बजाये, उसे और नुकसान पहुंचा सकती हैं. सरकार ने अपनी जांच के बाद 1850 दवाओं को अमानक स्तर का घोषित करते हुये, इन दवा निर्माता कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की थी. यह कार्रवाई जांच के बाद ही संभव हो पाई थी.

गौरतलब है कि केन्द्र सरकार द्वारा कराये गये जांच में छत्तीसगढ़ में 4.7% दवायें सब स्टैंटर्ड पाई गई हैं. जबकि राष्ट्रीय स्तर पर सब स्टैंडर्ड दवा पाये जाने का औसत 3.16% है. इस तरह से छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय औसत से ज्यादा सब स्टैंडर्ड की दवायें पाई गई हैं. लेकिन छत्तीसगढ़ में न तो जांच के लिये कर्मचारी हैं और ना ही राज्य सरकार में इस बात को लेकर अतिरिक्त गंभीरता कि वह दवाओं की जांच को लेकर सक्रिय हो.

दिलचस्प ये है कि राज्य में पिछले तीन सालों में नारकोटिक्स दवाओं को अवैध रुप से बेचे जाने के 203 मामले दर्ज किये गये हैं. लेकिन इनमें से किसी दवा को परीक्षण के लिये प्रयोगशाला में नहीं भेजा गया. इन दवाओं को केवल रैपर के आधार पर मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई. जबकि आशंका इस बात की है कि इनमें से कई अवसरों पर दवाओं के रैपर में खतरनाक नशीली दवायें हो सकती थीं. लेकिन ऐसे मामलों में सामान्य कार्रवाई करके मामले का निपटारा कर दिया गया.

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