गरीब मां ने बेटे का शव दान कर किया

जगदलपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के बस्तर में एक आदिवासी मां के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह अपने बेटे का अंतिम संस्कार कर सके. इसलिये उसने मेडिकल कॉलेज के लोगों के कहने पर अपने बेटे का शव ‘दान’ कर दिया. यह तब है, जब राज्य सरकार ने अस्पताल से घर तक जाने और अंतिम संस्कार करने के लिये आर्थिक सहायता देने तक की योजना बना रखी है.

इस गरीब मां के बेटे की मौत इलाज के दौरान मेडिकल कॉलेज में हो गई थी. चीरघर में बेटे का शव पड़ा था, जहां से गांव तक जाने के लिये भी पैसे नहीं थे. चीरघर के प्रभारी ने कहा कि गांव तक तो पहुंचना मुश्किल है. पहुंच गये तो भी अंतिम संस्कार करने के लिये तुम्हारे पास पैसे नहीं हैं. बेहतर है कि बेटे का शव मेडिकल कॉलेज को दान कर दो. मां ने गरीबी के कारण कलेजे पर बेबसी का पत्थर रखा और बेटे का शव मेडिकल कॉलेज को कथित रुप से ‘दान’ कर के अपने घर लौट गई.


मामला जगदलपुर के स्व. बलिराम कश्यप स्मृति शासकीय मेडिकल कालेज का है. गीदम के रहने वाले बामन अपने भाई-भाभी के घर बड़े अरनपुर में रहते थे. 21 साल के बामन यहीं रह कर कंडक्टरी का काम कर अपना गुजारा करते थे. सोमवार को एक वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी, जिसमें वे गंभीर रुप से घायल हो गये. परिवार के लोगों ने उन्हें मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान गुरुवार की शाम को उनकी मौत हो गई.

बामन की मां और भाभी के पास इतने पैसे भी नहीं थे कि गांव जा सकें और बामन का अंतिम संस्कार कर सकें. परिजन अपनी गरीबी के कारण परेशान थे और वे यहां तक तय कर चुके थे कि बामन का शव कहीं रास्ते में छोड़ कर चले जायेंगे. उनकी बातों को अस्पताल के चीरघर के एक कर्मचारी ने सुना तो उसने मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को सूचना दी और फिर गरीब मां को इस बात के लिये तैयार कर लिया गया कि वह ‘स्वेच्छा’ से अपने बेटे बामन का शवदान कर रही हैं.

मेडिकल कॉलेज के डीन यूएन पैंकरा का कहना है कि उनकी जानकारी में नहीं है कि गरीबी के कारण शव दान किया गया है. उन्होंने सरकार की योजनाओं को मृतक के परिजनों को बताने या उन्हें संबंधित सुविधा देने को लेकर भी किसी भी तरह की जानकारी से इंकार किया.

मृतक की भाभी प्रेमवती ने कहा- “बामन मुझे भाभी मां कहता था. उसका शव मेडिकल कॉलेज को देने के अलावा हमारे पास कोई चारा नहीं था. हम अब केवल यही चाहते हैं कि सब लोग प्रार्थना करें कि बामन की आत्मा को शांति मिले.”

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