गुरुघासीदास उद्यान बनेगा टाइगर रिजर्व

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में एक नये टाइगर रिजर्व को मंजूरी मिल गई है. गुरुघासीदास उद्यान को नये टाइगर रिजर्व के तौर पर मंजूरी दे दी गई है. इसे मिला कर अब राज्य में चार टाइगर रिजर्व हो जायेंगे.

गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान वास्तव में पूर्व में संजय नेशनल पार्क का एक हिस्सा था. जब मध्य प्रदेश से अलग करके छत्तीसगढ़ बंटा तो यह पार्क गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान के रूप में गठित किया गया था.


पार्क का 60% हिस्सा छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में स्थित है. यह राष्ट्रीय उद्यान 1471 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है.

खतरे में बाघ

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या आधी रह गई है. 2014 में राज्य में 46 बाघ होने का दावा किया गया था. लेकिन प्रधानमंत्री द्वारा इसी साल जारी एक रिपोर्ट के अनुसार राज्य में केवल 19 बाघ रह गये हैं.

यह स्थिति तब है, जब देश भर में बाघों की संख्या में वृद्धि हुई है.

राज्य में लगातार होने वाले शिकार और वन विभाग के अफसरों की लापरवाही के कारण राज्य में बाघ संकट में आ गये हैं. हालत ये है कि अधिकांश अभयारण्यों में बाघों की निगरानी की कोई पुख्या व्यवस्था राज्य बनने के 19 सालों बाद भी नहीं बन पाई है.

बाघों की निगरानी करने के लिये अलग-अलग अभयारण्यों में रखे गये दैनिक वेतनभोगी मजदूरों को कई-कई महीने का वेतन वन विभाग नहीं देता. इसके उलट राजधानी में बैठे अफसर लाखों रुपये अपना चेंबर सजाने में खर्च कर देते हैं.

ऐसे में नये टाइगर रिजर्व बनने से बाघों की संरक्षण की उम्मीद बढ़ गई है.

बड़े फैसले

रविवार को वाइल्ड लाइफ बोर्ड की बैठक में मध्यप्रदेश की तर्ज पर स्पेशल टास्क फोर्स भी बनाये जाने को मंजूरी दे दी गई है. इसे वन्य जीवों की रक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण क़दम माना जा रहा है.

बोर्ड की बैठक में सीसीएफ वाइल्ड लाइफ के बजाय टाइगर प्रोजेक्ट में फिल्ड डायरेक्टर के पद की अनुशंसा की गई है. बैठक में यह भी तय किया गया कि फिल्ड डायरेक्टर रायपुर या बिलासपुर में अड्डा जमा कर बैठने के बजाये संबंधित टाइगर रिजर्व में ही रहेंगे.

बाघों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने और उन्हें रेडियो कॉलर लगाये जाने को भी इस बैठक में मंजूरी दी गई. इसके अलावा अचानकमार टाइगर रिजर्व से 3 गांवों को विस्थापित करने का फैसला भी बोर्ड की बैठक में लिया गया.

राज्य में होने वाले वन संबंधी सभी रिपोर्टों को अब सार्वजनिक करने का फ़ैसला लिया गया है. बैठक में तय किया गया वन विभाग से संबंधित सभी संस्थानों की रिपोर्ट वन विभाग की वेबसाइट पर अपलोड की जायेगी. इससे पहले राज्य में वन विभाग से संबंधित अधिकांश रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई हैं.

हालत ये है कि वनभैंसा से लेकर जंगली सुअर तक सरकार ने करोड़ों रुपये राज्य सरकार ने खर्च कर दिये. लेकिन इनके दस्तावेज़ आज तक सार्वजनिक नहीं किये गये हैं.

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