ओरल सैक्स के कारण हर साल 7.8 करोड़ जिंदगी तबाह

नई दिल्ली | संवाददाता: ओरल सैक्स से होने वाले सुपर गनौरिया को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी जारी की है.विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि ओरल सैक्स के कारण पैदा हुये सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन लाइलाज साबित हो रहे हैं और दवाओं का इस पर कोई असर नहीं हो रहा है. यहां तक कि एंटी बायोटिक्स भी यहां बेअसर साबित हो रहे हैं. यह एक खतरनाक स्थिति है.

दुनिया भर के 77 देशों के आंकड़ों के आधार पर विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि ओरल सैक्स के कारण फ्रांस, जापान और स्पेन ऐसे देश हैं, जहां गनौरिया लाइलाज हो चुका है. यहां लोग परेशान हैं और दवायें काम नहीं कर रही हैं. हर साल दुनिया भर में 7.8 करोड़ लोग इस बीमारी से ग्रस्त हो रहे हैं और यह संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है.


डाक्टरों का कहना है कि यह जीवाणु से पैदा होने वाली इस नाइसीरिया गनौरिया के पीछे असुरक्षित वजाइनल, एनल और ओरल सैक्स को महत्वपूर्ण कारण माना जाता है. संकट ये है कि इसके इलाज के लिये जो दवा या एंटीबायोटिक दी जाती है, वह सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन के कारण असरकारक नहीं है.

चिकित्सकों ने चेतावनी देते हुये कहा है कि गनौरिया का बग बेहद शातिर है और हर दवा के साथ यह नये स्वरुप में आ जाता है. इसके ग्रस्त होने पर जननांग से हरे और पीले रंग का स्राव, पेशाब करते समय दर्द और मासिक धर्म के दौरान खून से इसकी पहचान की जा सकती है.

अंग्रेज़ों के जमाने में सूजाक नामक रोग हुआ करता था. कई वैज्ञानिकों का कहना है कि सुपर गनोरिया या सुपर गोनोरिया उसी की और खतरनाक स्वरूप है. इस बीमारी के बाद मनुष्य का गुर्दा भी प्रभावित हो जाता है. ऐसे में चिकित्सक हमेशा इस बीमारी का पता चलते ही इलाज के लिये प्रेरित करते हैं. अगर समय पर इलाज किया जाये तो कम से कम इस बीमारी के और फैलने या शरीर के दूसरे अंगों को प्रभावित करने से रोका जा सकता है.

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