धान ख़रीदी में छत्तीसगढ़ पिछड़ा

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाये जाने के बाद भी धान ख़रीदी की हालत ख़राब है. राज्य के 25 ज़िलों में पिछले साल की तुलना में धान ख़रीदी के आंकड़े में कमी आ गई है.

राज्य में इस साल 85 लाख मीट्रिक टन धान ख़रीदने का लक्ष्य सरकार ने तय किया है लेकिन अब तक केवल 67.56 लाख मीट्रिक टन की ही ख़रीदी हो पाई है.


हालत ये है कि कोरबा और सूरजपुर जैसे जिलों में अब तक धान ख़रीदी में 40 फ़ीसदी कम धान की ख़रीदी हुई है. यह तब है, जब एक दिसंबर से शुरु हुई धान ख़रीदने की समय सीमा खत्म होने में केवल 12 दिन बचे हुये हैं.

राज्य में भूपेश बघेल की सरकार ने सत्ता में आते ही धान का समर्थन मूल्य 2500 रुपये करने का वादा किया और पिछले साल धान की ख़रीदी भी इसी दर से की गई.

लेकिन इस साल धान खरीदी की शुरुआत देर से हुई और फिर एक के बाद एक सरकार के नियम बदलते रहे. अफसरों ने धान की ख़रीदी कम करने के लिहाज से किसानों का रकबा घटा दिया. कई ज़िलों में किसानों को तीन बार ही पर्ची दी गई. कई इलाकों में पंजीयन नहीं किया गया. कुछ मामले ऐसे भी आये, जब सरकारी अफसरों ने धान को अवैध बता कर उसे जब्त कर लिया.

किसानों की प्रताड़ना वाले इन नियमों का असर धान की ख़रीदी पर बहुत साफ़-साफ़ नज़र आ रहा है. इस साल सरकार ने 85 लाख मीट्रिक टन धान ख़रीदने का लक्ष्य रखा है. लेकिन आज की तारीख़ तक केवल 67.56 लाख मीट्रिक टन धान की ही ख़रीदी हुई है.

कोरबा में पिछले साल की तुलना में 43.98 प्रतिशत कम धान की ख़रीदी हुई है. इसी तरह सूरजपुर में 40.5 प्रतिशत, बलरामपुर में 32.32 प्रतिशत, सरगुजा में 27.51 प्रतिशत, जशपुर में 29.3 प्रतिशत धान की कम ख़रीदी हुई है.

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