छत्तीसगढ़ के जेलों की हालत दयनीय

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के जेलों की हालत क्षमता से ज्यादा कैदी भर दिये जाने से बड़ी दयनीय है. छत्तीसगढ़ के सभी 33 जेलों की कैदियों को रखने की क्षमता 10,247 हैं परन्तु इनमें 18,422 कैदी भरे हुये हैं. इस तरह से छत्तीसगढ़ के जेलों में 179 फीसदी कैदी ज्यादा रहते हैं. छत्तीसगढ़ में 5 केन्द्रीय जेल, 12 जिला जेल तथा 16 उप जेल हैं. इनमें से अंबिकापुर सेन्ट्रल जेल में 1, रायपुर सेन्ट्रल जेल में 1 तथा दुर्ग सेन्ट्रल जेल में 2 मौतें हुई हैं. जेल में सभी मौतें साल 2016 में हुई हैं.

गौरतलब है कि फरवरी 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जेलों में सुधार किस तरीके से हो इस पर कोर्ट पिछले 35 सालों से फैसले सुनाता रहा है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश का संविधान सभी को गौरव से जीवन जीने का अधिकार देता है वहीं देश की जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों के जीवन में रत्ती भर सुधार ही आ पाया है.


बता दें कि 13 जून 2013 के पूर्व CJI आरसी लाहोटी ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर कहा था कि जेल में बंद कैदियों की जिंदगी परेशान करने वाली है. उन्होंने जेल में बंद 1382 कैदियों के साथ अमानवीय बर्ताव का हवाला दिया था और कोर्ट ने इस पत्र को जनहित याचिका में तब्दील कर मामले की सुनवाई शुरू की थी.

फरवरी 2016 में इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम दिशानिर्देश जारी किये थे-

* सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विचाराधीन कैदियों को लेकर बनाई गई कमेटी हर तीन महीने में मीटिंग करे. डिस्ट्रिक्ट लीगल सेल कमेटी का सचिव कमेटी में शामिल हो और वह विचाराधीन कैदियों, सजा पूरी कर चुके कैदियों की रिहाई को लेकर कदम उठाये.

* कमेटी उन विचाराधीन कैदियों की रिहाई के लिए कदम उठाये जो गरीबी की वजह से बेल बांड नहीं भर पा रहे हैं.

* कमेटी उस कानून का पालन करने का भी प्रयास करने जिसके तहत पहली बार अपराध करने वाले अपराघी को सामाजिक मुख्य धारा में लौटने का मौका दिया जाता है.

* गरीब विचाराधीन और सजायाफ्ता कैदियों के लिए वकीलों की नियुक्ति हो. DGP या जेल का IGP कैदियों के स्वास्थ्य, भोजन, कपड़े का विशेष ध्यान रखे और तय करे कि कैदियों की जिंदगी गौरवपूर्ण तरीके से चले.

* कोर्ट ने महिला और बाल विकास मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी कर कहा है कि मंत्रालय बाल सुधार गृह में रहने वाले नाबालिगों की हालत को सुधारने के लिए नियम बनाये.

* सुप्रीम कोर्ट इस आदेश के बाद जेलों में बंद कैदियों की अप्राकृतिक मौत, जेलों में स्टाफ की कमी और जेल स्टाफ के उचित परीक्षण पर सुनवाई करेगा.

फोटो: प्रतीकात्मक

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