रमन सिंह के पीएस ने कहा-एक लाख लो, जोगी के मामले में चुप रहो

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की जाति के मामले में एक शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री रमन सिंह और उनके पीएस पर गंभीर आरोप लगाये हैं. शिकायतकर्ता संत कुमार नेताम ने कहा है कि उन्हें मुख्यमंत्री निवास में बुला कर पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की जाति मामले में चुप रहने के लिये कहा गया है. इसके अलावा उन्हें कथित रुप से एक लाख रुपये की रिश्वत देने की भी पेशकश की गई. हालांकि इस मामले में आरोपी मुख्यमंत्री के निजी संचिव ओपी गुप्ता का कहना है कि आरोप निराधार हैं और संत कुमार नेताम खुद मुख्यमंत्री से मिलना चाहते थे. हालांकि संत कुमार नेताम का कहना है कि पूरे मामले के कॉल रिकार्ड और मुख्यमंत्री निवास में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच कर ली जाये. ये रहा नेताम का पूरा किस्सा, नेताम के ही शब्दों में-

मुख्यमंत्री निवास में मुख्यमंत्री की उपस्थिति में मुझे बुलाकर अजीत जोगी के मामले से अब पीछे हटने के लिए दबावपूर्वक कहा गया है. मुख्यमंत्री की ओर से उनके निजी सचिव ओ पी गुप्ता ने मुझे अजीत जोगी के मामले में अब आगे ओर ज्यादा कार्यवाही करने से मना किया. ओपी गुप्ता के अनुसार ये सभी बाते मुझे मुख्यमंत्री के निर्देशों पर कही गयी और उस समय मुख्यमंत्री रमन सिंह खुद भी हाउस में मौजूद थे. मुझे जोगी केस से पीछे हटने के लिए जो फोन आये उनका विवरण इस प्रकार है.


तारीख़- 30 जून 2017
फ़ोन नम्बर जिससे मुझे कॉल आया- 94242-25848
फ़ोन करने वाले का नाम- ओ पी गुप्ता, निजी सचिव, मुख्यमंत्री रमन सिंह
समय- लगभग 2.30

क्या कहा- मुख्यमंत्रीजी आपसे (संत कुमार नेताम ) मिलना चाहते है . तब मैंने कहा मैं हाईकोर्ट में हूं, अगले दिन आने के लिए कहा. मैं उत्साहित था कि मुझे 13 साल में पहली बार हमारे नेता मुखिया रमन सिंह ने मुझे मिलने के लिए बुलाया. मुझे लगा कि वे मुझे बधाई देंगे और जोगी के खिलाफ मामला दर्ज करने की कार्यवाही करेंगे. लेकिन अगले दिन मैं जब लगभग 4 बजे रायपुर पहुंच जाने की सुचना श्री ओ पी गुप्ता को दिया तब उन्होंने मुझे वापस कॉल करके बुलाने की बात कही. लेकिन रात 8 बजे तक मुझे कोई कॉल नही आया. तब मैंने वापस जाने का फैसला किया और कुर्ला एक्सप्रेस में बिलासपुर जाने के लिए बैठ गया. लेकिन इसके बाद लगभग 8.30 पर मुझे ओ पी गुप्ता का फ़ोन आया कि मुझे मुख्यमंत्रीजी बुला रहे हैं लेकिन मुझे बुलाने के बावजूद 4 घंटे तक नही मिले न कोई सन्देश आया, इसलिए मैं उनसे नही मिला और मैंने मना कर दिया.

तारीख़- 5 जुलाई 2017
मोबाइल नम्बर- 94242-25848
कॉल करने वाले व्यक्ति- ओ पी गुप्ता, निजी सचिव, मुख्यमंत्री रमन सिंह
समय – लगभग शाम 7 बजे

शाम 7 बजे ओ पी गुप्ता जी ने मुझे कॉल किया और कहा कि मुख्यमंत्री आपसे मिलना चाहते हैं, कल आ जाइये. मैंने कहा शाम को आऊंगा तो उन्होंने मुझे 1 बजे के आस पास मुख्यमंत्री निवास आने को कहा. तय समय पर मैं मुख्यमंत्री निवास पंहुचा लेकिन गेट पर मेरे आने की कोई सूचना नही दी गयी थी इसलिए मैं 1 घंटे धुप में परेशान हुआ. बाद में जब जब 2 -3 बार कॉल करने के बाद फ़ोन उठाया तो मैंने उन्हें अपनी आपत्ति दर्ज करायी और कहा कि जब बुलाते हो तो गेट पर सूचित भी करना चाहिए, आपको ऐसे परेशान नही करना चाहिए. इसके बाद श्री गुप्ता ने मुझे अंदर बुलाया. गेट पर मेरे नाम की रजिस्टर में एंट्री हुई और मेरे दस्तखत लेने के बाद मुझे अंदर बुलाया, जहाँ ओ पी गुप्ता थे. मेरी उनसे मुलाकात हुई, मुख्यमंत्री बाजू में ही कमरे में थे. गुप्ता जी ने मुझे नाराजगी भरे शब्दों में कहा कि आप मुख्यमंत्री के खिलाफ ऐसे क्यों बोलते रहते हो. जोगी मामले में आप जो कर रहे है, वो ठीक नही है. मुख्यमंत्री आपसे बहुत नाराज है. मुख्यमंत्री चाहते हैं कि आप जोगी के मामले से अब पीछे हट जाओ. साथ ही कहा कि अब आ गए हो तो मुख्यमंत्री से मुलाकात कर लो लेकिन वो बहुत नाराज हैं. और आगे से अब मुख्यमंत्री और जोगी के खिलाफ में कोई भी स्टैंड मत लेना. मुख्यमंत्री ने आपके लिए एक लाख रूपये दिए है. बाहर निकलोगे तो गेट के बाजू वाले कमरे में तुम्हें 1 लाख रुपये का पैकेट मिल जायेगा. आप उसे लेकर चले जाइयेगा.

मैं ओ पी गुप्ता की बाते सुनकर सकते में आ गया क्योंकि मैंने ऐसी उम्मीद नही की थी. तब मैंने सोचा कि अब मुख्यमंत्री से मिलूंगा तो मुझे शाबासी देने के बजाय (जैसा मैंने सोचा था) मुझे डांटेंगे और मुझे जोगी मामले से दूर रहने कहेंगे, इसलिए मैंने मुख्यमंत्री से मुलाकात नही की और मैं बाहर निकलने लगा तो सी एम हाउस का पूरा स्टाफ, ओ पी गुप्ता समेत बाहर आये मेरे पीछे और मुझे एक लाख का पैकेट देने की कोशिश की लेकिन मैं गुस्से में बाहर आ गया बिना उनकी कोई भी बात सुने. मुझे सभी घेर रहे थे और मेरे पीछे बाहर में गेट तक सभी फोर्स और गुप्ताजी आये और मुझे एक लाख का पैकेट लेने और मुख्यमंत्री से मिलने का दबाव बनाते रहे लेकिन मैं बाहर निकल गए. इसके बाद सीएम हाउस से मुझे कोई फ़ोन नही आया चूँकि मैंने सख्त लहजे में कह दिया था कि आप लोग गलत काम करते हो. उनके अप्रत्याशित व्यवहार से हैरान हो के मैं वापस बिलासपुर आ गया.

मेरे जो सवाल हैं वो ये है-
मुख्यमंत्री स्पष्ट करें कि वो ऐसा क्यों चाहते हैं कि मैं जोगी मामले से अब दूर रहूँ और आगे नही बढूँ.

ये सारा घटना क्रम मुख्यमंत्री निवास के सीसीटीवी कैमरे में भी रिकॉर्ड होगा, यदि वे खराब नही हुए होंगे और उनसे कोई छेड़छाड़ नही हुई होगी तो.

यदि मुख्यमंत्री ऐसा नही चाहते हैं तो उनका निजी सचिव ओ पी गुप्ता किसके इशारे पर मुझे जोगी मामले से मुख्यमंत्री जी के हवाले से पीछे हटने के लिए कह रहे थे और मुझे एक लाख का पैकेट ऑफर कर रहे थे जोगी या स्वयं मुख्यमंत्री.

मेरी बातें यदि तथ्यहीन हैं तो मुख्यमंत्री स्पष्ट करे कि क्यों वे अजीत जोगी के खिलाफ मामला दर्ज नही करा रहे हैं, जबकि इस मामले में अब कोई जांच नही होनी है, सिर्फ कार्यवाही होनी है और वो मुख्यमंत्री चाहे तो महज एक मिनट का काम है.

इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. मैं इसकी शिकायत हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह और हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री नन्द कुमार साय को भी शिकायत करूंगा.

इस मामले के खुलासे के बाद मेरी जान को भी ख़तरा है चूँकि मैं एक पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के खिलाफ 17साल से लड़ाई लड़ रहा हूं और उन्हें बचाने के लिए हमारी पार्टी के मौजूदा मुख्यमंत्री रमन सिंह मुझे अब इस मामले में चुप रहने के लिए न केवल दबाव बना रहे है, बल्कि मुख्यमंत्री निवास में रिश्वत ऑफर कर रहे हैं.

अंत में मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि मैं आज बहुत आहत ही नहीं हैरान भी हूं कि मेरी जिस लड़ाई में 17 सालो से मेरी पार्टी की सरकार रहते हुए भी मुझे कोई सपोर्ट नही मिला लेकिन जब मेरी लड़ाई का नतीजा मुझे मिलने का समय आया तो मुझे शाबासी देने या मेरा प्रोत्साहन करने के बजाय मुझे मेरी ही पार्टी की सरकार के जरिये मुझे डराया और धमकाया जा रहा है. ये आदिवासियों के हित में बिलकुल नहीं है. जो लोग आदिवासियों के हक़ और हितों पर लगातार डाका डाल रहे हैं, उनके खिलाफ हमारी सरकार कार्यवाही करने के बजाय उन्हें बचा रही है. मैं आज उतना ही भयभीत हूं, जितना कि अजीत जोगी के मुख्यमंत्री काल में था लेकिन मैं न तब डरा था और न आज डरूंगा.

संत कुमार नेताम
याचिकाकर्ता
ग्राम-उस्लापुर, पोस्ट-सकरी
जिला- बिलासपुर 495003
मोबाइल- 94252-27850

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