रोटोमैक की जांच पहुंची रायपुर

रायपुर | संवाददाता: रोटोमैक के मालिक विक्रम कोठारी के करोड़ों के घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने रायपुर में भी कुछ व्यवसायियों से पूछताछ शुरु की है. बुधवार को जांच एजेंसी ने रायपुर के उन व्यवसायियों से पूछताछ की, जिनके साथ विक्रम कोठारी के लेन-देन के रिश्ते रहे हैं. इनमें से एक बागड़िया ब्रदर्स से लंबी पूछताछ के बाद कुछ बैंक खातों को भी सिल किये जाने की खबर है.

प्रवर्तन निदेशालय इस बात की जांच कर रही है कि कोठारी के धंधे में क्या छत्तीसगढ़ में भी कोई पार्टनर की भूमिका में था? आरंभिक तौर पर जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार रायपुर के अपने सेंटर के सहारे कोठारी ने कथित तौर पर कई बड़ी गड़बड़ियां की हैं. उन्होंने गेंहूं खरीदने के नाम पर बैंकों से भारी रकम बतौर ऋण लिया और इस रकम में हेर-फेर किया गया.


आरोप है कि रायपुर के बागड़िया ब्रदर्स ने कानपुर के रोटोमैक के मालिक विक्रम कोठारी के करोड़ों रुपये सिंगापुर भेजे और हवाला के जरिये पैसों की हेराफेरी की.

गौरतलब है कि सीबीआई ने बैंक आफ बड़ौदा से कानपुर की रोटोमैक ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड, उसके निदेशक विक्रम कोठारी, उनकी पत्नी साधना कोठारी और उनके बेटे राहुल कोठारी तथा अज्ञात बैंक अधिकारियों के खिलाफ मिली शिकायत के बाद मामला दर्ज किया. इन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा को लेकर भारतीय दंड संहिता तथा भ्रष्टाचार निरोधक कानून की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी कंपनी के प्रवर्तकों के खिलाफ मनी लांड्रिंग निरोधक कानून (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया है. ईडी इस बात की जांच करेगा कि क्या धोखाधड़ी से प्राप्त राशि का उपयोग अवैध संपत्ति और कालाधन सृजन में किया गया. सीबीआई के अनुसार इस मामले में बैंक आफ बड़ौदा (456.53 करोड़ रुपये), बैंक आफ इंडिया (754.77 करोड़ रुपये), बैंक आफ महाराष्ट्र (49.82 करोड़ रुपये), इलाहबाद बैंक (330.68 करोड़ रुपये), ओरिएंटल बैंक आफ कामर्स (97.47 करोड़ रुपये), इंडियन ओवरसीज बैंक (771.07 करोड़ रुपये) तथा यूनियन बैंक आफ इंडिया (458.95 करोड़ रुपये) ने रोटोमैक को कर्ज दे रखे हैं. सीबीआई का कहना है कि आरोपियों ने सातों बैंकों से प्राप्त 2,919 करोड़ रुपये के लोन की हेराफेरी की है. वहीं उन पर ब्याज समेत कुल बकाया राशि 3,695 करोड़ रुपये है.

पिछले साल का एक मामला छत्तीसगढ़ में भी सामने आया है, जिसमें आरोप है कि रोटोमैक के मालिक विक्रम कोठारी ने 2013 में रायपुर के उद्योगपति और बागड़िया ब्रदर्स के मालिकों से 6 करोड़ रुपये उधार लिये थे. जिसे उन्होंने साल भर के भीतर चुकाने का वादा किया था. इसके बदले बाप-बेटे ने पोस्ट डेटेड चेक भी उन्हें दिये थे. लेकिन जब बागड़िया ब्रदर्स ने चेक बैंक में जमा कराये तो चेक बाउंस हो गये. इसके बाद बागड़िया ब्रदर्स ने विक्रम कोठारी और उनके बेटे राहुल कोठारी के खिलाफ कोर्ट में मामला दर्ज़ कराया.

कोर्ट द्वारा बार-बार वारंट जारी करने के बाद भी कोठारी ने जब कोई जवाब नहीं दिया तो पिछले साल फरवरी में रायपुर की अदालत ने दोनों बाप-बेटे के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया. पुलिस जब इन्हें गिरफ्तार करने पहुंची तो दोनों पिता पुत्र फरार हो गये. इसके बाद बड़ी मुश्किल से दोनों पिता-पुत्र बच पाये थे.

रोटोमैक का एक केंद्र रायपुर के पंडरी इलाके में भी रहा है, जहां पेन के अलावा दूसरे धंधे भी चलाये जाने की सूचना है. विक्रम कोठारी 7 कंपनियों में निदेशक हैं. जिनमें से एक कंपनी अनाज का व्यापार करती रही है.

सूत्रों का कहना है कि प्रवर्तन निदेशालय की नजर अनाज के नाम पर पैसों की अफरातफरी करने वाली कंपनी पर ही है. विक्रम कोठारी, अकांक्षा गुप्ता, साधना कोठारी और राहुल कोठारी से जुड़ी तमाम कंपनियां और व्यवसाय में जुड़े लोगों की जांच प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई कर रही है.

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