साही को कुलपति बनाने से एवीबीपी नाराज

रायपुर | संवाददाता: बिलासपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सदानंद शाही का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है.प्रोफेसर शाही के नाम का अभी आदेश भर जारी हुआ है लेकिन भारतीय जनता पार्टी और एवीबीपी से जुड़े नेता विरोध में सड़कों पर उतर आये हैं. दूसरी ओर राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री प्रेम प्रकाश पांडेय ने अपनी ही पार्टी के लोगों के विरोध के बीच कहा है कि कुलपति की नियुक्ति का अधिकार कुलाधिपति राज्यपाल के पास होता है.

बुधवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने बिलासपुर विश्वविद्यालय में जम कर नारेबाजी की प्रदर्शन किया. विद्यार्थी परिषद ने अब चेतावनी दी है कि अगर प्रोफेसर साही की नियुक्ति रद्द नहीं की जाती है तो उनका संगठन राज्य भर में आंदोलन करेगा.


विद्यार्थी परिषद के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष मंडावी के मुताबिक उनका संगठन प्रोफेसर सदानंद शाही का विरोध इसलिए कर रहा है क्योंकि सदानंद ने माओवादी संगठन को कविता के माध्यम से आवाज़ देने वाले वरवरा राव की कविताओं को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में प्राथमिकता दी थी.

मंडावी ने आरोप लगाया कि जब देश में असहिष्णुता को लेकर बहस चल रही थी तब भी प्रोफेसर सदानंद साही ने पुरस्कार वापसी को सही बताया था. इसके आधार पर विद्यार्थी परिषद मानती है कि नए कुलपति सदानंद राष्ट्रविरोधी मानसिकता के हैं.

हालांकि बनारस विश्वविद्यालय में हिंदी के प्राध्यापक सदानंद साही की पहचान एक साहित्यकार के बतौर रही है. कुशीनगर जिले के सिंगहा गांव के निवासी सदानंद साही की किताबें परंपरा और प्रतिरोध, दलित साहित्य की अवधारणा और प्रेमचंद चर्चित रही हैं. इसके अलावा उनका कविता संग्रह असीम कुछ भी नहीं भी हिंदी कविता की बेहतर कृतियों में शुमार है. छात्र राजनीति से अध्यापन के पेशे में आये प्रोफेसर साही भोजपुरी भाषा के उत्थान के लिये लगातार संघर्षरत रहे हैं.

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