सतत विकास लक्ष्य में छत्तीसगढ़ फिसड्डी

रायपुर | संवाददाता : नीति आयोग के एसडीजी यानी सतत् विकास लक्ष्य में छत्तीसगढ़ की हालत ख़राब है. इसी सप्ताह जारी की गई एसडीजी रिपोर्ट 2019-20 में छत्तीसगढ़ को 28 राज्यों में से 21वां स्थान मिला है. नीति आयोग की इस रिपोर्ट के लिये मूल रुप से 2015 से 2018 तक के आंकड़ों का उपयोग किया गया है. इस दौरान राज्य में रमन सिंह की भाजपा सरकार थी.

हालत ये है कि सतत् विकास लक्ष्य में भारत का जो औसत अंक है, छ्तीसगढ़ उससे भी पीछे है.


आयोग के एसडीजी भारत सूचकांक में सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण के क्षेत्र में राज्यों की प्रगति के आधार पर उनके प्रदर्शन को आंका जाता है और उनकी रैंकिंग की जाती है.

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘सूचकांक में केरल 70 अंक के साथ शीर्ष पायदान पर बना रहा. केंद्रशासित प्रदेशों में चंडीगढ़ भी 70 अंक के साथ शीर्ष स्थान पर रहा.’

सूची में हिमाचल प्रदेश दूसरे स्थान पर जबकि आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना तीनों तीसरे स्थान पर रहे. सतत् विकास लक्ष्यों के इस साल के सूचकांक में बिहार, झारखंड और अरूणाचल प्रदेश का प्रदर्शन सबसे खराब रहा.

नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अमिताभ कांत ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र का 2030 का एसडीजी लक्ष्य भारत के बिना कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता… हम स्वस्थ विकास के संयुक्तराष्ट्र में तय लक्ष्यों को हासिल करने के लिये पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं.’

2019-20 की एसडीजी रिपोर्ट में केरल पहले नंबर पर है, जिसे 70 अंक मिले हैं. वहीं सबसे पीछे बिहार है, जिसे 50 अंक मिले हैं.

जिन राज्यों को सतत् विकास लक्ष्य में बेहतर माना गया है, उनमें हिमाचल प्रदेश 69, आंध्र प्रदेश 67, तमिलनाडु 67, तेलंगाना 67, कर्नाटक 66, गोवा 65 और सिक्किम 65 शामिल हैं.

इसके अलावा राज्य शासित प्रदेशों में चंडीगढ़ 70 और पांडिचेरी 66 को भी बेहतर माना गया है.

भारत का औसत सतत् विकास लक्ष्य को 60 अंक हासिल हुये हैं, जबकि छत्तीसगढ़ को 56 अंक मिले हैं.

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