छत्तीसगढ़ में फिर एक बाघ का शिकार

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में एक बाघ के अवशेष मिलने की खबर है. अधिकारियों का कहना है कि मौके से वन विभाग को बाघ की हड्डियां समेत कुछ अन्य हिस्से मिले हैं. वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह बाघ संभवतः ओडिशा से यहां आया होगा. दूसरी ओर ओडिशा के अधिकारियों ने इससे इंकार किया है.

हालांकि इससे पहले भी एक बाघ के शिकार के मामले में वन विभाग ने इसी तरह का दावा किया था. लेकिन बाघ की पट्टियों के आधार पर यह बात सामने आई कि यह बाघ छत्तीसगढ़ का ही था.


वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सोमवार को ही उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में एक बाघ के शव के अवशेष मिलने की ख़बर सामने आई थी. बाघ का शव का हिस्सा नगरी के जिस इलाके में पाया गया है, वह ओडिशा की रायगड़ा की सीमा से लगा हुआ है. बाघ की खाल और नाखून समेत अधिकांश हिस्से निकाले जा चुके हैं. सोमवार को ही इलाके में एक टीम भेजी गई थी.

इसके बाद मंगलवार को वन विभाग ने रायपुर से कुछ वन अधिकारियों को मामले की जांच के लिये मौके पर रवाना किया है.

लगातार कम होते बाघ

छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या लगातार कम होती जा रही है. शिकार के मामलों को भी राज्य सरकार के वन विभाग का अमला रोक पाने में असफल साबित हुआ है.

आंकड़े बताते हैं कि पिछली गणना की तुलना में छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या आधी रह गई है.

2014 में राज्य में 46 बाघ होने का दावा किया गया था. लेकिन प्रधानमंत्री द्वारा 29 जुलाई को जारी रिपोर्ट के अनुसार राज्य में केवल 19 बाघ रह गये हैं. यह स्थिति तब है, जब देश भर में बाघों की संख्या में वृद्धि हुई है.

हालत ये है कि अधिकांश अभयारण्यों में बाघों की निगरानी की कोई पुख्या व्यवस्था राज्य बनने के 19 सालों बाद भी नहीं बन पाई है.

बाघों की निगरानी करने के लिये अलग-अलग अभयारण्यों में रखे गये दैनिक वेतनभोगी मजदूरों को कई-कई महीने का वेतन वन विभाग नहीं देता. इसके उलट राजधानी में बैठे अफसर लाखों रुपये अपना चेंबर सजाने में खर्च कर देते हैं.

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