सिलगेर :पीछे नहीं हट रहे आदिवासी

रायपुर | संवाददाता: सुकमा के सिलगेर में पुलिस कैंप हटाये जाने की मांग कमज़ोर पड़ती नज़र नहीं आ रही है. इधर पुलिस ने कहा है कि आसपास के गांवों में तेज़ी से कोराना संक्रमण फैला है.

पुलिस ने आशंका जताई है कि भारी संख्या में आदिवासियों की भीड़ और प्रदर्शन से कोरोना फैलने का ख़तरा बना हुआ है.


गौतरलब है कि पिछले पखवाड़े भर से बीजापुर और सुकमा ज़िले की सीमा पर स्थित सिलगेर में पुलिस कैंप खोले जाने का आदिवासी विरोध कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि कैंप खुलने के बाद आदिवासियों की खेती बाड़ी, वनोपज संग्रहण और कहीं आना-जाना भी प्रतिबंधित हो जाता है.

ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षाबल के जवान कभी भी गांवों में घुस कर ग्रामीणों के साथ मारपीट करते हैं, लूटपाट करते हैं और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करते हैं.

ग्रामीण इसी बात को लेकर 14 मई से सिलगेर कैंप के सामने प्रदर्शन कर रहे थे. 17 मई को दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरु हुआ और पुलिस की गोलीबारी में 3 आदिवासी मारे गये थे.

पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन माओवादियों के इशारे पर हो रहा है और मारे गये तीनों आदिवासी भी माओवादी थे. हालांकि सर्व आदिवासी समाज, आदिवासी महासभा जैसे संगठनों नें जांच के बाद पुलिस के आरोप को झूठा बताया है.

इसके अलावा प्रशासन ने भी मृतकों को 10-10 हज़ार रुपये का मुआवजा दिया था, जिसके कारण पुलिस के दावे पर सवाल उठ रहे हैं.

इस बीच बस्तर के आईजी सुंदरराज पी ने कहा है कि आसपास के इलाके में बड़ी संख्या में कोरोना का संक्रमण हुआ है. ऐसे में सड़क जाम कर बैठे आदिवासियों में भी संक्रमण का ख़तरा हो सकता है.

उन्होंने कहा कि ग्रामीणों में कोरोना के प्रति जागरुकता के लिए प्रचार-प्रसार किया जा रहा है. साथ ही हेलिकॉप्टर से भी पर्चे गिराये जा रहे हैं.

दूसरी ओर ग्रामीणों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है. ग्रामीणों ने मारे गये तीन आदिवासियों और घटना वाले दिन घायल हुई एक गर्भवती महिला, जिसकी बाद में मौत हो गई; की स्मृति में मौके पर ही पत्थरों का एक स्मारक भी बना दिया है.

ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी भी स्थिति में पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने कहा कि यह आरपार की लड़ाई है.

उन्होंने आरोप लगाया कि गांव वालों की ज़मीन पर कब्जा कर के कैंप बनाया जा रहा है. इसके अलावा कभी भी इस तरह के कैंप के लिए ग्रामसभा नहीं की जाती. यह आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों का हनन है.

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