वर्षा डोंगरे ने दिया सरकार को 500 पन्नों में जवाब

रायपुर | संवाददाता: रायपुर के सेंट्रल जेल की निलंबित उप अधीक्षक वर्षा डोंगरे ने सरकार को अपना जवाब पेश कर दिया है.सरकार ने कुछ दिन पहले ही उन्हें आरोप पत्र सौंपा था. पहले की ही तरह वर्षा डोंगरे ने अपना जवाब 500 से अधिक पृष्ठों में सौंपा है. इससे पहले सोशल मीडिया को लेकर सरकार के 32 पन्ने के सवालों के जवाब में वर्षा डोंगरे ने 376 पन्नों में जवाब दिया था.

वर्षा डोंगरे 13 जून को संतोष कुंजाम के साथ विवाह सूत्र में बंधने वाली हैं. उससे चार दिन पहले शनिवार को वर्षा रायपुर पहुंची, जहां उन्होंने सरकार को अपना जवाब पेश किया.


गौरतलब है कि बस्तर में सुरक्षाबलों द्वारा आदिवासी बच्चियों और महिलाओं के साथ बलात्कार और कथित प्रताड़ना के मामले पर रायपुर सेंट्रल जेल की डिप्टी जेलर वर्षा डोंगरे ने सोशल मीडिया में एक पोस्ट किया था. वर्षा का दावा है कि उन्होंने सीबीआई, सुप्रीम कोर्ट और सरकार के ही दस्तावेज़ों के हवाले से सब कुछ लिखा था. लेकिन सरकार की इस गंभीर आलोचना से हंगामा मच गया.

वर्षा डोंगरे का पोस्ट सार्वजनिक होने के बाद राज्य सरकार ने आनन-फानन में उन्हें रात आठ बजे नोटिस थमा दी. इसके अगले दिन वर्षा ने स्वास्थ्यगत कारणों से चार दिनों का अवकास संबंधी मेल जेल प्रशासन को सौंपा. इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा सौंपे गये 32 पन्नों के नोटिस के जवाब में 376 पन्नों का जवाब भी पेश कर दिया. इसके बाद जेल प्रशासन ने बिना स्वीकृति के अवकाश पर जाने और सोशल मीडिया में कथित गैरजिम्मेदारी के साथ तथ्यहीन और भ्रामक जानकारी पोस्ट करने के आरोप में निलंबित कर दिया.

निलंबन के दौरान अंबिकापुर जेल को उनका मुख्यालय बनाया गया है. जहां उन्होंने 10 मई को अपनी उपस्थिति दी और उसी दिन जेल प्रशासन ने उन्हें आरोप पत्र जारी किया. इसमें एक माह के भीतर आरोप पत्र का जवाब मांगा गया था.

शनिवार को वर्षा डोंगरे ने तय सीमा के तहत जेल प्रशासन को व्यक्तिगत रुप से उपस्थित हो कर अपना जवाब पेश कर दिया है. जेल प्रशासन से जुड़े लोगों का कहना है कि वर्षा ने इन जवाबों में अचानकमार टाइगर रिज़र्व से विस्थापित आदिवासियों से लेकर बस्तर में माओवादियों के नाम पर आदिवासियों की प्रताड़ना को लेकर विस्तृत रिपोर्ट पेश की है. इन रिपोर्ट के साथ वर्षा डोंगरे ने सबूत भी पेश किये हैं.

500 से भी अधिक पन्नों में, छत्तीसगढ़ में सरकार आदिवासियों के साथ किस तरह का व्यवहार कर रही है, उसको लेकर सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, मानवाधिकार आयोग समेत दूसरे आयोगों की रिपोर्ट और फैसलों की प्रति भी संलग्न की गई है.

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