बेहोशी की हालात में मिले प्रवीण तोगड़िया, अस्पताल में भर्ती

अहमदाबाद। डेस्क: सुबह से लापता विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया अहमदाबाद में अचेत हालत में मिले। उन्हें अहमदाबाद के चंदमणि अस्पताल में भर्ती कराया गया है। तोगड़िया शूगर लेवल कम होने के कारण बेहोश हो गए थे,उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों ने कहा कि उन्हें अभी पूरा होश नहीं आया है। इससे पहले खबर आई थी कि तोगड़िया तबसे लापता हैं जब राजस्थान पुलिस का एक दल एक पुराने मामले में उन्हें गिरफ्तार करने यहां पहुंचा।

इससे पहले विहिप ने दावा किया था कि राजस्थान पुलिस ने एक प्रकरण के सिलसिले में 62 वर्षीय तोगड़िया को हिरासत में लिया है लेकिन पुलिस ने इस बात से इन्कार किया है। तोगड़िया के लापता होने को लेकर बना रहस्य उस समय और गहरा गया जब एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि स्थानीय सोला पुलिस या राजस्थान पुलिस किसी ने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया है।


सवाई माधोपुर के एसपी ममन सिंह ने बताया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 188 से जुड़े इस मामले में गंगापुर पुलिस अहमदाबाद गयी थी पर यह बिना तोगड़िया को गिरफ्तार किये वापस लौट आयी। यहां क्राइम ब्रांच के संयुक्त पुलिस आयुक्त जे के भट्ट ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर तोगड़िया को एक विशेष टीम ढूंढ रही है। उनका जल्द ही पता लगा लिया जायेगा। उनको गुजरात अथवा राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया है। वारंट किसी बहुत गंभीर मामले से जुड़ा नहीं था। राजस्थान पुलिस ने सोला पुलिस से वारंट के तामीले के लिए मदद मांगी थी। दोनों तोगड़िया के आवास पर गए थे पर वह वहां नही थे उसके बाद पुलिस लौट आयी। एक पुलिस कांस्टेबल ने बताया कि वह किसी व्यक्ति के साथ ऑटो रिक्शा में बैठकर कही चले गये थे।
वही विहिप के प्रदेश महामंत्री रणछोड़ भरवाड़ ने पत्रकारों से कहा कि बताया जा रहा है कि पुलिस ने उन्हें कार्यालय से पकड़ा था। तोगड़िया का फोन भी लगातार बंद है और उनका कुछ भी पता नहीं है। हमे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता हो रही है क्योंकि उन्होंने भी कुछ समय पहले उन्हें खतरे की आशंका जतायी थी। गौरतलब है कि तोगड़िया के खिलाफ पिछले सप्ताह 21 साल पुराने मारपीट के एक मामले में यहां अदालत की ओर से गैर जमानती वारंट जारी होने पर विहिप ने कड़ा विरोध किया था। पांच जनवरी को विहिप नेता की पेशी के बाद यह वारंट रद्द हो गया था। तब तोगड़िया ने आरोप लगाया था कि उनकी राम मंदिर निर्माण की मांग समेत अन्य मांगों पर उनकी आवाज बंद कराने के लिए कोई उन्हें डराना चाहता है।

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