खतरे में है नीतीश कुमार की सरकार?

पटना | संवाददाता: नीतीश कुमार की सरकार पर खतरा मंडरा रहा है. भाजपा की उनकी सरकार पर सेंध लगाने का काम कोई और नहीं, उन्हीं की पार्टी के वरिष्ठतम नेता शरद यादव कर रहे हैं. इस बीच खबर है कि नीतीश कुमार अपने नेता शरद यादव को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा सकते हैं.

इसके लिये नीतीश ने पार्टी की बैठक बुलाई है, जहां शरद यादव को पार्टी के संसदीय दल के नेता पद से हटाकर पार्टी से निलंबित किया जायेगा. हालांकि नीतीश कुमार का कहना है कि 19 अगस्त को बुलाई गई पार्टी की बैठक एक सामान्य बैठक है.


हालांकि शरद यादव के खिलाफ ऐसा कोई निर्णय लिये जाने पर नीतीश कुमार की सरकार भी खतरे में पड़ सकती है और धर्मनिरपेक्षता के नाम एक जुट हो कर लालू और शरद यादव की जोड़ी नीतीश-भाजपा की सरकार को मुश्किल में डाल सकते हैं. शरद यादव के साथ पार्टी के कई विधायक नीतीश कुमार का साथ छोड़ सकते हैं.

बीस महीने पुराने जदयू और राजद गठबंधन को तोड़ कर हाईवोल्टेज ड्रामा करने के बाद नीतीश ने जब भाजपा के साथ मिल कर सरकार बनाई, तभी से शरद यादव नाराज चल रहे थे. सूत्रों का कहना है कि शरद यादव को विश्वास में लिये बिना नीतीश कुमार ने यह फैसला लिया. यही कारण है कि शरद यादव पहले दिन से ही इस मामले में नाराजगी जताते रहे हैं. इसके बाद वे अब नीतीश के फैसले को बिहार की जनता से विश्वासघात और वादाखिलाफी करार देते हुए ‘जनता से संवाद’ के नाम पर बिहार की सड़कों पर निकल पड़े हैं, जहां उन्हें जनता का खासा समर्थन मिल रहा है.

शरद यादव ने जिस तरीके से अपनी ही सरकार के खिलाफ बिगुल फूंका है, उसका निहितार्थ केवल इतना भर है कि बिहार से नीतीश कुमार की सरकार की विदाई हो और राजद के साथ कोई सरकार बने. ऐसा नहीं होने पर दूसरा उपाय बिहार में फिर से विधानसभा चुनाव के रास्ते को अख्तियार करना हो सकता है. जिसके लिये लालू से लेकर शरद यादव तक तैयार बैठे हैं. जाहिर है, भाजपा तो ऐसे ही किसी अवसर की प्रतीक्षा में है, जहां नीतीश कुमार को भी लंगड़ी मार कर पूर्ण बहुमत से अपनी सरकार बनाने की खिचड़ी पकने के खबर है.

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