गोरखालैंड आंदोलन से क्षेत्र के पर्यटन को नुकसान

दार्जीलिंग | एजेंसी: तेलंगाना राज्य को यूपीए की सहमति से गोरखालैंड की मांग भी काफी मुखर हो हई है जिसका खामियाज़ा दार्जीलिंग और आस-पास के इलाकों के पर्यटन को उठाना पड़ रहा है. इलाके के बस और कार संचालकों की बुकिंग्स रद्द हो रही हैं और ट्रेकिंग तथा कैंपिंग गतिविधियां भी लगभग ठप पड़ गई हैं.

दिल्ली स्थित इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स के कार्यकारी निदेशक गौर कांजीलाल ने बताया कि फिलहाल हिमालय की यात्रा करने वाले पर्यटकों के की नजर में दार्जीलिंग बिल्कुल नहीं है. वे कुल्लू मनाली या शिमला को तरजीह दे रहे हैं. कोलकाता के यात्रा संचालकों के मुताबिक पर्यटक भूटान और पश्चिम बंगाल के उत्तर में स्थित डुअर्स का रास्ता पकड़ रहे हैं.

कांजीलाल ने कहा, “वापस लौटने वालों ने काफी बुरा अनुभव बताया है. न तो भोजन, न पानी, न परिवहन के साधन. इसलिए बाकी ने दार्जीलिंग जाने का विचार छोड़ दिया. इस तरह त्यौहार सत्र (अक्टूबर में दुर्गापूजा) और समग्र रूप से पर्यटन पर अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं.”

दार्जीलिंग में अस्मिता ट्रेक एंड टूर्स के सुभाष तमांग ने आईएएनएस से कहा, “संदकफू (पश्चिम बंगाल की सबसे ऊंची चोटी), फालुत और सिंगालिला (राष्ट्रीय उद्यान) के लिए हमारे सभी बुकिंग रद्द हो गई है. अब वहां कोई नहीं जाना चाहता.”

तेलंगाना के अलग राज्य का रास्ता साफ होने के बाद अब गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) ने भी दार्जीलिंग और इलाके के सबसे बड़े शहर सिलिगुड़ी को अलग कर गोरखालैंड बनाने की मांग तेज कर दी है. उन्होंने तीन अगस्त से अनिश्चितकालीन बंद कर रखी है, जिसके कारण दार्जीलिंग जिले के सिलीगुड़ी को सिक्किम की राजधानी गंगटोक से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 31ए पर यातायात ठप है.

इस बीच मेघालय के गारो घाटी इलाके के कुछ संगठन भी गोरखालैंड की मांग में जुड़ गए हैं. उन्होंने गारो के पाँच मुख्यालयों को गोरखालैंड राज्य में जोड़ने की मांग की है.

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