अतिरिक्त स्पेक्ट्रम आवंटन की सुनवाई 4 अप्रैल को

नई दिल्ली | एजेंसी: दिल्ली की एक अदालत ने निजी कंपनियों को अतिरिक्त स्पेक्ट्रम आवंटन मामले की सुनवाई चार अप्रैल तय की है.

इस मामले में सीबीआई ने मित्तल, रुइया और हचिसन मैक्स टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड के तत्कालीन प्रबंध निदेशक असीम घोष पहले नामित नहीं किया था लेकिन फिर भी विशेष अदालत ने उन्हें सम्मन भेजा था.

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ओ.पी. सैनी ने मामले को चार अप्रैल तक के लिए स्थगित किया है. अदालत में मित्तल उपस्थित नहीं हुए, जबकि पूर्व दूरसंचार सचिव श्यामल घोष उपस्थित हुए.

यह मामला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासन काल से संबंधित है, जिसमें जनवरी 2002 में केंद्र सरकार के फैसले के जरिए निजी कंपनियों को अतिरिक्त स्पेक्ट्रम आवंटित किया गया था. मामले की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय ने 26 अप्रैल 2013 को अगले आदेश तक के लिए स्थगित कर दी थी.

दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनी भारती एयरटेल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक सुनील मित्तल और एस्सार समूह के प्रमोटर रवि रुइया की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने यह आदेश दिया था. याचिका में विशेष अदालत के 19 मार्च 2013 के आदेश को चुनौती दी गई थी. इस आदेश में विशेष अदालत ने दोनों को मामले में आरोपी के रूप में सम्मन भेजा था.

सीबीआई ने 21 दिसंबर 2012 को इस मामले में दाखिल आरोप पत्र में तीन दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियों भारती सेल्युलर लिमिटेड, हचिसन मैक्स टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड (अब वोडाफोन इंडिया लिमिटेड) और स्टर्लिग सेल्युलर लिमिटेड (अब वोडाफोन मोबाइल सर्विस लिमिटेड) और श्यामल घोष को आरोपी बनाया था.

यह मामला 31 जनवरी 2002 को लिए गए एक फैसले से संबंधित है, जिसके तहत दूरसंचार विभाग ने अतिरिक्त स्पेक्ट्रम आवंटित की थी. तब राजग सत्ता में था. कथित तौर पर इस आवंटन से सरकार को 846 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था.

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