जोगी बोले

कनक तिवारी
कहावत है-सूप तो सूप चलनी क्या बोले जिसमें बहत्तर छेद.

अजीत जोगी ने इसी संदर्भ में एक दिलचस्प बयान दिया है. उन्होंने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को इस बात के लिए बधाई दी है कि उन्होंने मेडिकल कॉलेजों के लिए स्नात्कोत्तर परीक्षाओं के लिए सीटें बढ़ा दी हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री की इस बात के लिए भी प्रशंसा की है कि निजी क्षेत्र को शिक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए उदारतापूर्वक सामने आना चाहिए. इसके साथ साथ जोगी ने अपनी पीठ भी ठोंकी है.

वैसे कुदरत ने हाथ इसलिए बनाए हैं कि उनसे दूसरों की पीठ ठोंकी जा सके अपनी नहीं. उन्होंने ऐलान किया कि यह उनकी मौलिक सोच थी कि प्रदेश में कई निजी विश्वविद्यालय खोले जाएं. इसके लिए उनकी सरकार ने ज़रूरी विधायन भी किया.

अजीत जोगी के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ में सवा सौ के करीब विश्वविद्यालय खोले गए. जोगी ने लेकिन यह नहीं बताया कि देश के वरिष्ठ वैज्ञानिक और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर यशपाल तथा बिलासपुर के युवा सामाजिक कार्यकर्ता सुदीप श्रीवास्तव ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका लगाई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने जोगी सरकार के शताधिक विश्वविद्यालय खोलने के तुगलकी आदेश को रद्द कर दिया था और फटकार भी लगाई थी. जोगी सरकार ने ही मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की प्रीमेडिकल परीक्षाओं को रद्द कर दिया था. इससे नेताओं, उद्योगपतियों और नौकरशाहों के बच्चों को बारहवीं परीक्षा के अंकों के आधार पर दाखिला मिलने की संभावनाएं बढ़ गई थीं.

इस निर्णय को भी छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर फैसला देते निरस्त कर दिया था. जोगी सरकार ने ही बिलासपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज सिम्स में प्रथम वर्ष के दाखिले की सौ सीटों में से पचास सीटों पर अमीरों के लिए अधिक प्रवेश शुल्क लेकर आरक्षित कर दी थी.

इन सीटों पर प्रतियोगी परीक्षाओं के काबिल विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं मिल सकता था. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ ने इस अजीबोगरीब आदेश को भी निरस्त कर दिया था.

छत्तीसगढ़ के मनोरोग चिकित्सकों के निजी अस्पतालों में पांच सितारा होटलों के बराबर सुविधाएं दिए बगैर नहीं चलाने का हुक्म भी जोगी सरकार ने दिया था. इस निर्णय को भी छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था.

डॉ. मनमोहन सिंह की निजीकरण की थ्योरी को न जाने क्यों अजीत जोगी ने समर्थन दिया है. निजी क्षेत्र के स्कूल फीस और दाखिले को लेकर जिस तरह लूट खसोट कर रहे हैं. उसके खिलाफ दुर्ग जिले के अभिभावक काबिलेतारीफ विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं.

निजी तकनीकी महाविद्यालय भी लूट खसोट का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं. कांग्रेस की केन्द्र सरकार के अतिरिक्त अविभाजित मध्यप्रदेश की दिग्विजय सरकार ने महाविद्यालयों और स्कूलों के अध्यापकों के साथ जो अन्याय किया है, उस पर तो कई ग्रंथ लिखे जा सकते हैं. जोगी सरकार ने ऐसे निर्णयों को कायम रखा और ये निर्णय आज भी कायम है.
* उसने कहा है-12

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