कालेधन पर सरकार कठोर: जेटली

नई दिल्ली | एजेंसी: वित्तमंत्री अरूण जेटली ने स्पष्ट किया कि कालेधन पर यू टर्न नहीं लिया है. उन्होंने आगे बताया कि कालेधन पर न्यायालयीन प्रक्रिया शुरु होने के बाद इसकी जानकारी सार्वजनिक की जायेगी. सर्वोच्च न्यायालय में देश के बाहर के बैंकों में काला धन जमा करने वाले लोगों के नाम सरकार द्वारा जाहिर न करने की बात कहने के एक दिन बाद केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को कहा कि ऐसा उन्होंने कानूनी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए कहा था. सोशल मीडिया पर लिखे एक लेख में वित्त मंत्री ने कहा, “काले धन पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का रुख कठोर है, लेकिन जोखिमपूर्ण नहीं.”

उन्होंने कहा, “मैं इस बात से थोड़ा आश्चर्यचकित हूं कि आज के अखबारों में कुछ शीर्षकों में कहा गया है कि राजग सरकार ने काले धन के मुद्दे पर यू टर्न ले लिया है. इस बात में जरा सी भी सच्चाई नहीं.”

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार विदेशी बैंकों के खाताधारकों से संबंधित कोई सूचना नहीं रोकेगी. लेकिन इसका खुलासा तभी होगा, जब इस मामले की जांच पूरी हो जाएगी और हम किसी निष्कर्ष तक पहुंच जाएंगे.

उन्होंने कहा, “अदालत के बाहर किसी तरह के अपुष्ट खुलासे से न केवल जांच पर फर्क पड़ेगा, बल्कि इससे कुछ खाताधारकों को अपराध से बचने का भी मौका मिल जाएगा.”

“ऐसा करने से अन्य देशों के साथ किए गए दोहरे कराधान से बचाव समझौते का भी उल्लंघन होगा और ऐसा होने से भविष्य में वे देश इस संबंध में हमसे कोई भी सूचना साझा नहीं करेंगे.”

उन्होंने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार पर आरोप लगाया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बावजूद उसने इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन नहीं किया.

जेटली ने कहा, “नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल ने पहली बैठक में ही एसआईटी की नियुक्ति करने का फैसला लिया. तब से वह प्रभावी रूप से इस मामले की जांच कर रहा है.”

मंत्री ने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने जर्मनी द्वारा भारत को दिए गए नामों को प्रस्तुत करने का सरकार को निर्देश दिया था. उन्होंने कहा कि वे नाम याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराया गया, जिसे उसने सार्वजनिक कर दिया.

उन्होंने कहा, “डीटीएए के उल्लंघन के लिए जर्मनी ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी.”

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