झूठी शान के लिये बदायूं हत्याकांड?

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: बदायूं रेप केस में रेप ही नहीं हुआ था. इसकी पुष्टि हैदराबाद स्थिति सेंटर फॉर डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एंड डायगनोस्टिक्स ने किया है. सीबीआई सूत्रों का कहना है कि यदि दोनों चचेरी बहनों से रेप नहीं हुआ था तो शक की सुई परिजनों की तरफ इशारा कर रही है. सूत्रों का कहना है कि झूठी शान के नाम पर हत्या से इंकार नहीं किया जा सकता है. गौरतलब है कि बदायूं में दो चचेरी बहनों को कथित तौर पर रेप के बाद हत्याकर शवों को पेड़ से लटका दिया गया था.

इससे पहले सीबीआई ने जब पांचों आरोपियों का पॉलीग्राफ टेस्ट किया था तो वैज्ञानिक तौर पर इसकी पुष्टि हो गई थी कि आरोपी झूठ नहीं बोल रहें हैं. गौरतलब है कि पांचों आरोपियों के फोरेंसिक मनोवैज्ञानिक आकलन, फोरेंसिक बयान विश्लेषण व पॉलीग्राफ टेस्ट लिए थे. जिसके आधार पर सीबीआई का कहना है कि पांचों आरोपियों पप्पू, अवधेश, उर्वेश यादव, कांस्टेबल छत्रपाल यादव और सर्वेश यादव के बयान में कोई अंतर नहीं पाया गया था.

आरोपियों ने दुष्कर्म, हत्या और सबूतों को नष्ट के करने के आरोपों से स्पष्ट इनकार किया था. इन पांचों आरोपियों को बीते जून में सीबीआई ने मामला दर्ज करने के बाद हिरासत में लिया था. गौरतलब है कि पॉलीग्राफ एक प्रकार का सत्य परीक्षण होता है. इसका प्रयोग आपराधिक मामलों की जांच हेतु किया जाता है. उसके बाद सीबीआई ने मृतकों के परिजनों का लाई डिटेक्टर टेस्ट किया ता जिससे खुलासा हुआ कि परिजन झूठ बोल रहें थे.

गौरतलब है कि बदायूं के उसैत थाना क्षेत्र के कटरा गांव में दो किशोरियों से सामूहिक दुष्कर्म के बाद उनकी हत्या करके शवों को पेड़ से लटका दिया गया था. ये दोनों किशोरियां शौच जाने के लिए घर से निकलीं थी और इसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल पाया था, जबकि बाद में इनका शव पेड़ से लटका पाया गया था.

अब जब, सरकारी लैब ने हत्या के पहले रेप के आरोप से इंकार कर दिया है, आरोपियों के पॉलीग्राफ टेस्ट में उनके झूठ न बोलने की पुष्टि हो चुकी है तथा परिजनों के बयान के विपरीत लाई डिटेक्टर टेस्ट में उनके झूठ बोलने की बात साबित हो गई है, आरोपियों को जमानत मिल सकता है. इसके बावजूद बदायूं में बहनों की पेड़ पर लटकती शवों का सच सामने नहीं आया है.

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