भाजपा है नक्सलवाद की पोषक-कांग्रेस

रायपुर | संवाददाता: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल और कांग्रेस विधायक दल के नेता टी.एस. सिंहदेव ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी और नक्सलवाद का गठजोड़ राज्य में नक्सलवाद की जड़े मजबूत करने में सबसे बड़ी सहायक बनी है. कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं सांसद सोहन पोटाई, विधायक विक्रम उसेंडी, भीमा मंडावी के नक्सलवादियों के मददगारों के घनिष्ठ संबंधों के उजागर होने के बावजूद इन नेताओं की गिरफ्तारी नहीं होना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि सत्तारूढ़ भाजपा और राज्य सरकार को अपने इन नेताओं के गतिविधियों की पूरी जानकारी थी.

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि इन्हीं नेताओं के माध्यम से भाजपा नक्सलियों से गठजोड़ कर अपनी राजनीतिक हितों को फलीभूत करती रही है. अपने बयान में कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि प्रदेश कांग्रेस के शहीद अध्यक्ष स्व. नंद कुमार पटेल लगातार भाजपा के नक्सलवादियों से गठजोड़ की बातें उठाते रहे थे.

भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री रमन सिंह ने चुनाव के पूर्व ब्रम्हास्त्र चलाने की बात कही थी, उसके बाद जीरम घाटी का दुर्दांत नक्सल हमला हुआ जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शहीद हो गये. भाजपा सरकार की बस्तर से नक्सलवाद का खात्मा करने की नीयत कभी रही ही नहीं. इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, सड़क रोजगार सुविधाओं का विस्तार सिर्फ कागजों में किया गया.
कांग्रेस नेताओं ने अपने बयान में आरोप लगाया है कि भाजपाई जन प्रतिनिधि नक्सली मददगारों के माध्यम से एक मजबूत गठजोड़ बना कर इन क्षेत्रों के विकास के लिये आने वाली केन्द्रीय राशि को अपनी जेबों में भरते रहे. नक्सली आतंक के आड़ में नक्सलवादी और भाजपाई दोनों आर्थिक रूप से मजबूत होते रहे.

अपने बयान में नेताओं ने कहा है कि बस्तर की मासूम जनता नक्सली और भाजपाईयों के इस नापाक गठजोड़ में पिसती रही. नक्सल मददगारों की भाजपा मे कितनी गहरी पैठ थी, वह इसी से साबित होती है कि भाजपा और आर.एस.एस. के वरिष्ठ नेता जब भी बस्तर दौरे पर जाते थे, नक्सल मददगार चोपड़ा परिवार के यहां रूकते थे तथा भोजन भी उसी के यहां करते थे. कांग्रेस नेताओं ने सांसद सोहन पोटाई और विधायक विक्रम उसेंडी की नक्सल मददगार के रूप में संलिप्ता की जांच सी.बी.आई. से करवाने की अनुशंसा भाजपा सरकार से करने की मांग की है.

सरकार पर आरोप लगाते हुये इन नेताओं ने कहा है कि पुलिस वरिष्ठ भाजपा नेताओं पर हाथ डालने में घबरा रही है. अभी जितने लोगों को भी पुलिस ने नक्सल गतिविधियों में संलिप्त पाया है, सबके उपर जनसुरक्षा अधिनियम के तहत कार्यवाही की गयी है. फिर सांसद सोहन पोटाई, विधायक विक्रम उसेन्डी, पूर्व विधायक भीमा मंडावी और अन्य भाजपा नेता कैसे अभी तक जनसुरक्षा कानून की गिरफ्त से बाहर है?
अपने बयान में नेताओं ने कहा है कि बड़े-बड़े नक्सली खुलेआम राजधानी में घूमते रहे, ईलाज कराते रहे, माल में खरीददारी करते रहे, पिक्चरे देखते रहे, मुख्यमंत्री निवास जैसे अति संवेदनशील सुरक्षा व्यवस्था वाले इलाके मे स्थित छत्तीसगढ़ क्लब में, जहां अमूमन प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी ही जाते है; वहां उद्योगों के प्रतिनिधियों की बैठके करते रहे, यह सब बिना उच्चस्तरीय राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं है. अतः इस मामले की जांच स्थानीय पुलिस निष्पक्षता से नहीं कर पायेगी.

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