छत्तीसगढ़: भूमि के सौदे में गड़बड़ी

रायपुर | संवाददाता: कैग की रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि छत्तीसगढ़ में जमीन की खरीदी-बिक्री में लाखों के राजस्व का घोटाला हुआ है. नियंत्रक एवं महालेखाकार ने साल 2015 के दौरान राज्य में जमीन की खरीदी-बिक्री के दस्तावेजों के जांच के दौरान पाया कि जमीन की कीमत कम दिखाकर उप पर लगने वाले स्टाम्प तथा रजिस्ट्री शुल्क की चोरी की गई है.

एक मामलें में तो तीन अलग-अलग जमीन को एक बताया गया जिसके फलस्वरूप संपत्ति का मूल्यांकन स्लैब दर से न करके हेक्टेयर की दर पर किया गया जिससे सरकार को स्टाम्प में 27.35 लाख का चूना लगाया गया.


रायपुर में फरवरी 2015 में तीन अलग-अलग खसरों तथा ऋण पुस्तिकाओँ के 0.25 हेक्टेयर जमीन का सौदा किया गया. छत्तीसगढ़ बाजार मूल्य मार्गदर्शिका सिद्धांत 2013-14 के अनुसार 0.243 हेक्टेयर या उससे कम मूल्य के कृषि जमीन का बाजार भाव स्लैब दर से किया जाता है तथा इससे अधिक के जमीन के बाजार मूल्य की गणना हेक्टेयर की दर से किया जाता है.

रायपुर में उपपंजीयक द्वारा उक्त जमीन को एक ही मानकर उसका मूल्य निर्धारण किया गया. फलस्वरूप बाजार मू्ल्य 87.50 लाख रुपये निर्धारित किया गया उस पर स्टाम्प ड्यूटी 4.55 लाख रुपये तथा रजिस्ट्री फीस 70 हजार रुपये लगाया गया. जबकि अपनी जांच में कैग ने पाया कि इनमें से 2 विक्रेता एक ही परिवार से तथा 1 विक्रता खुद खरीदने वाले का पति था. पहले के दो लोगों की जमीन 0.238 हेक्टेयर तथा तीसरे की जमीन 0.012 हेक्टेयर पाई गई. जिसे मिलाकर जमीन को 0.25 हेक्टेयर की बनाकर सरकार को राजस्व का चूना लगाया गया.

नियमानुसार जमीन बाजार भाव 5.43 करोड़ रुपये का होता है जिस पर सरकार को स्टाम्प ड्यूटी 28.26 लाख रुपये तथा रजिस्ट्री फीस 4.34 लाख रुपये की होनी चाहिये. इस तरह से जमीन के मूल्य को 4.56 करोड़ रुपये कम करके दिखाया गया. जिससे सरकार को 27.35 लाख रुपये के राजस्व की हानि हुई है.

इसी तरह से रायपुर, बिलासपुर तथा सक्ती के जमीन सौदे की जांच में पाया गया कि मुख्य मार्ग की जमीन को अंदर की जमीन मानकर उसका मूल्यांकन किया गया जिससे सरकार को 24.96 लाख के राजस्व का नुकसान हुआ है.

कैग ने अपनी जांच में पाया है कि नगर निगम, नगर पालिका तथा नगर पंचायत क्षेत्र में कृषि भूमि विक्रय के समय उसके बाजार मूल्य का आकलन कम किया गया जिससे सरकार को 17.42 लाख रुपयों के राजस्व की हानि हुई है.

इसी तरह से राज्य के अन्य स्थानों पर भी बाजार मूल्य कम दिखाकर सरकार के राजस्व में लाखों का चूना लगाया गया है. जाहिर है कि छत्तीसगढ़ में जमीन के सौदे में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की जा रही है जिससे सरकार को लाखों का नुकसान हो रहा है.

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