छत्तीगढ़: कैंसर का सरकारी इलाज संभव

रायपुर | जेके कर: छत्तीसगढ़ के रायपुर के सरकारी अस्पताल में कैंसर का इलाज कराया जा सकता है. राजधानी रायपुर में कैंसर होने न होने की पुष्टि अब महज 15 मिनट में करना संभव है. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में देश का पहला मेडिकल कालेज है, जहां लीनियर एक्सीलरेटर और रेपीड आर्क स्ट्रीरियोटैक्टिक सुविधा उपलब्ध कराई गई है. बड़े शहरों में कैंसर का इलाज करवाने का खर्च 6-8 लाख रुपयों तक का आता है.

हमारे देश के किसी भी शासकीय कैंसर चिकित्सा संस्थान में स्थापित यह तीसरी लीनियर एक्सीलरेटर मशीन है. इस मशीन से सिर्फ एक या दो सीटिंग में मरीज के दो से ढाई सेन्टीमीटर आकार के ट्यूमर को मूलतः नष्ट किया जा सकता है.


इसके द्वारा पिन पाइंट रेडियेशन दिया जाता है, जो केवल गांठ तक सीमित रहता है. आस-पास के सामान्य उत्तक पूर्ण से रेडियेशन हानि से बच जाते हैं. इसके फलस्वरूप मरीज रेडियेशन के कुप्रभाव के बिना पूर्ण रूप से स्वस्थ हो जाते हैं.

सोमवार शाम छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने इस मशीन का लोकार्पण पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और डॉ. अम्बेडकर अस्पताल परिसर स्थित राज्य सरकार के क्षेत्रीय कैंसर संस्थान में किया. गरीबों को यहां कैंसर के इलाज की निःशुल्क सुविधा मिलेगी.

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार का यह क्षेत्रीय कैंसर चिकित्सा संस्थान दुनिया का पहला और इकलौता ऐसा संस्थान है, जहां राज्य के बीपीएल श्रेणी के और स्मार्ट कार्ड धारक कैंसर पीड़ितों को यह सुविधा निःशुल्क दी जाएगी, जबकि बड़े शहरों में इस अत्याधुनिक मशीन से इलाज के लिए 6 लाख से लेकर 10 लाख रूपए तक शुल्क लिया जाता है.

राजधानी रायपुर के क्षेत्रीय कैंसर चिकित्सा संस्थान में इस सुविधा के शुरू होने के बाद छत्तीसगढ़ के साथ-साथ महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, ओड़िशा, उत्तर प्रदेश आदि आस-पास के राज्यों के मरीज भी रायपुर आकर इसका लाभ उठा सकेंगे.

मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने इस अवसर पर संस्थान में आधुनिक कोबाल्ट थेरेपी मशीन की स्थापना के लिए राज्य सरकार की ओर से आवश्यक वित्तीय सहायता दिलाने का आश्वासन दिया.

छत्तीसगढ़ में कैंसर के मरीज
गौरतलब है कि देश के अन्य हिस्सों की तरह ही छत्तीसगढ़ में भई कैंसर के मरीज लगातार बढ़ते जा रहें हैं. यदि पिछले तान सालों के सरकारी आकड़ों पर नज़र डाले तो छत्तीसगढ़ में साल 2012 में 60,936 साल 2013 में 62,980 तथा साल 2014 में 65,084 मरीजों में कैंसर का प्रसार हुआ है. जाहिर है कि छत्तीसगढ़ में कैंसर बढ़ता ही जा रहा है. जबकि साल 2014 में देशभर में कैंसर के 30,16,628 नये मरीज देखने को मिले थे. इस प्रकार से देश होने वाले कैंसर के नये मरीजों में छत्तीसगढ़ से 2.15 फीसदी मरीज होते हैं.

इसी तरह से कैंसर से होने वाली मौतों का आकड़ा भी बढ़ता ही जा रहा है. साल 2012 में छत्तीसगढ़ में कैंसर से 9,930 साल 2013 में 10,263 तथा साल 2014 में 10,606 मौतें हुई थी. जबकि देशभर में साल 2014 में 4,91,598 मरीजों की मौत कैंसर से हुई थी इसमें भी छत्तीसगढ़ की भागीदारी 2.15 फीसदी ही है.

छत्तीसगढ़ के सरकारी कैंसर संस्थान में इलाज का आकड़ा
*रायपुर के इस संस्थान के रेडियो थैरेपी विभाग में हर साल लगभग 37 हजार से 40 हजार तक मरीजों का इलाज किया जा रहा है.

*वर्ष 2015 में यहां कुल 3979 मरीजों का पंजीयन किया गया और पुराने 34 हजार 500 मरीजों को मिलाकर अब यहां पर 38 हजार 471 मरीजों का इलाज किया जा रहा है.

*संस्थान में अब तक लगभग 46 हजार 358 मरीजों का उपचार रेडिएशन (कोबाल्ट थेरेपी और लीनियर एक्सीलेटर) से किया गया.

*18 हजार 227 मरीजों को किमोथेरेपी दी गई और 3037 मरीजों का इलाज ब्रेकीथेरेपी से किया गया.

*इस दौरान करीब 21 हजार 641 मरीजों को वार्ड में भर्ती कर चिकित्सा सुविधा दी गई और 30 हजार 745 मरीजों का इलाज निःशुल्क किया गया.

*2032 मरीजों के कैंसर की सर्जरी भी सफलतापूर्वक की गई है. लगभग 500 मरीजों की बायोप्सी, एण्डोस्कोपी करते हुए उनके छोटे ऑपरेशन भी किए गए हैं.

*अंको रेडियोलॉजी यूनिट में वर्ष 2015 में कुल 3456 मरीजों का सी.टी.स्केन, 1401 मरीजों का यू.एस.जी. सोनोग्राफी और 1018 मरीजों का मेमोग्राफी भी किया गया है.

*विभाग में हुए ऑपरेशनों में से 250 से ज्यादा ऑपरेशन सुप्रा-सुप्रा मेजर सर्जरी और 350 से ज्यादा सुप्रा मेजर सर्जरी सफलतापूर्वक की गई है.

यह भी उल्लेखनीय है कि रायपुर के अम्बेडकर अस्पताल परिसर में क्षेत्रीय कैंसर संस्थान की स्थापना 14 फरवरी 2003 को हुई थी. संस्थान में 17 मार्च 2004 को ब्रेकीथेरेपी मशीन, 14 अगस्त 2004 को मेमोग्राफी मशीन, 19 जून 2010 को कैंसर आई.सी.यू. और लीनियर एक्सीलरेटर की स्थापना की गई. अक्टूबर 2015 में वहां ऑनसेन्ट्रा ब्रेकीथेरेपी और जनवरी 2016 में फ्रोजन सेक्सन मशीन लगाई गई.

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