केन्द्र सरकार SC में चुनौती देगी

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता: राष्ट्रपति शासन हटाने के उत्तराखंड हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जायेगी. उत्तराखंड हाई कोर्ट ने अपने गुरुवार के फैसले में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के आदेश को पलट दिया है तथा 29 अप्रैल को विधानसभा में हरीश रावत को बहुमत साबित करने का मौका दिया है. बीबीसी की खबरों के मुताबिक हाई कोर्ट ने कांग्रेस ने नौ बागी विधायकों को भी झटका दिया है. बीबीसी की रिपोर्ट में समाचार एजेंसी पीटीआई ने हाई कोर्ट के हवाले से बताया गया है, “कांग्रेस के नौ बागी विधायकों को पार्टी से टूट के ‘संवैधानिक पाप’ की कीमत अयोग्य होकर चुकानी होगी.”

केन्द्र सरकार के लिये उत्तराखंड का मुद्दा एक अहम मुद्दा बन गया है. आज सुप्रीम कोर्ट इस पर क्या निर्णय लेती है उसपर उत्तराखंड ही नहीं राष्ट्रीय राजनीति में भी केन्द्र सरकार की अग्निपरीक्षा हो जायेगी.

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यदि सुप्रीम कोर्ट उत्तराखंड हाई कोर्ट के आदेश में कोई परिवर्तन नहीं करती है तो कांग्रेस के 9 बागी विधायकों को 29 अप्रैल के शक्ति परीक्षण में मताधिकार का अधिकार नहीं रहेगा. उत्तराखंड विधानसभा में कुल 71 सीटें हैं. जिनमें से 9 बागियो सहित कांग्रेस के पास 36, भाजपा के पास 27, उत्तराखंड क्रांति दल के पास 1, निर्दलीय 3, बीएसपी के पास 2 तथा भाजपा से निष्कासित 1 विधायक हैं.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा यदि हाई कोर्ट के निर्णय को न बदला जाये तो कांग्रेस के अपने 27 तथा भाजपा के पास 27 सीटें हैं. ऐसी स्थिति में हरीश रावत सरकार के पास बहुमत अन्यों के समर्थन से बहुमत साबित करने का मौका रहेगा.

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इसके उलट यदि सुप्रीम कोर्ट कांग्रेस के 9 बागी विधायकों को मताधिकार का अधिकार दे देती है तो भाजपा के पक्ष में 27+9= 36 विधायक हो जायेंगे. इससे हरीश रावत सरकार को निश्चित तौर पर हार का सामना करना पड़ सकता है.

यदि उत्तराखंड विधानसभा में हरीश रावत अपना बहुमत न साबित कर सके तो कांग्रेस की बहुत किरकिरी होगी तथा केन्द्र सरकार की उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने की बात नौतिक तौर पर सही साबित हो जायेगी.

इसके विपरीत यदि हरीश रावत विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर दें तो केन्द्र सरकार के खिलाफ़ एक राजनीतिक माहौल बनेगा तथा यह माना जायेगा कि उसने बेवजह उत्तराखंड में हस्तक्षेप किया था. पहले से केन्द्र सरकार को घेरने का मौका तलाश रही विपक्ष को एकजुट होने के लिये एक मुद्दा मिल जायेगा.

उल्लेखनीय है कि अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने गुरुवार को कहा, “हाईकोर्ट का राष्ट्रपति की अधिसूचना को निरस्त करना गलत है. राष्ट्रपति की अधिसूचना उपयुक्त सामग्री पर आधारित है.” हाईकोर्ट ने गुरुवार को अपने फैसले में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लागू करना शीर्ष अदालत द्वारा निर्धारित कानून के विपरीत है.

इस पर रोहतगी ने कहा, “18 मार्च को पारित विनियोग विधेयक दरअसल पारित ही नहीं हुआ और उसके बावजूद विधानसभा अध्यक्ष ने इसे प्रमाणित कर दिया, जिसका वास्तव में अर्थ हुआ कि सरकार गिर गई. विधानसभा अध्यक्ष के आदेश से अल्पमत सरकार को जारी रहने दिया गया.”

खबरों के मुताबिक अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि वह शुक्रवार सुबह प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर की पीठ के समक्ष मामले को रखेंगे और फैसले पर रोक की मांग करेंगे.

यदि सुप्रीम कोर्ट उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के केन्द्र के निर्णय को सही ठहराती है तो यथास्थिति बनी रहेगी.

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