सूखे से छत्तीसगढ़ में हाहाकार- जोगी

रायपुर | समाचार डेस्क: पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने कहा है कि प्रदेश में विगत् 13 वर्षों से रमन सरकार है. विकास का ढिंढोरा पीटने वाली रमन सरकार का आलम यह है कि जहां हमारे मुख्यमंत्रित्वकाल में जो सिंचाई की स्थिति रही है उसमें इतने लम्बे समय में भी 10% से ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हो सकी है, जो कि अक्षमता का परिणाम है. आज पूरा प्रदेश अकाल की स्थिति के साथ-साथ पीने के पानी तक की कमी से जूझ रहा है.

यह इस प्रदेश का दुर्भाग्य है कि प्रदेश के मुखिया रमन सिंह को 13 वर्षों तक राज करने के पश्चात प्रदेश के तालाबों की सुध आई है. जबकि हमारे मात्र 2-3 वर्षों के कार्यकाल में मेरे द्वारा जनहित में हजारों तालाबों का निर्माण, गहरीकरण के साथ ही साथ डबरियों का निर्माण कराया गया था. यह भी दुर्भाग्य है कि भाजपा सरकार उन तालाबों का संरक्षण कर उन्हें भी सुरक्षित नहीं रख सकी है. अगर हमारे शासनकाल की तरह रमन सरकार तालाबों और डबरियों पर ध्यान केंद्रित करती तो आज प्रदेश की जनता को अकाल के साथ ही पीने के पानी की किल्लत नहीं झेलनी पड़ती.


छत्तीसगढ़ में हमें अपने पूर्वजों से सीख लेनी चाहिए क्योंकि उनके माध्यम से प्रदेश के सभी ग्रामों में बड़ी संख्या में तालाबों और डबरियों का निर्माण किया गया था. सौभाग्य से हमारे प्रदेश में लगभग 50 इंच प्रतिवर्ष वर्षा होती है और यदि इस पानी को रोक लिया जाये तो हमारे प्रदेश में पेयजल, सिंचाई और उद्योगों के लिए पानी की कोई कमी नहीं रहेगी.

श्री जोगी ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि उन सभी पुराने तालाबों और डबरियों को चिन्हांकित किया जाये जो पूर्व में उन्हें पाटकर अन्य कामों के लिए उपयोग किया जा रहा हैं. कहीं खेती हो रही है तो कहीं आवास और उद्योगों तालाबों के स्थान पर स्थापित हो गये हैं. ये तालाब हमारे पुरखों ने ऐसे स्थानों पर खुदवाये थे जहां पानी की बहुत अच्छी आवक थी, इसलिए इनका पुनः निर्माण करना बहुत आवश्यक है. उदाहरण के लिए रतनपुर में तत्कालीन सुयोग्य कल्चुरी शासकों ने 365 बड़े तालाब बनवाये थे, किन्तु अब 20-25 ही शेष रह गये हैं.

इसी प्रकार अंबिकापुर शहर के मध्य में 53 एकड़ का बड़ा तालाब था, जिससे पूरे शहर में भूजल की रिचार्जिंग होती थी. अंबिकापुर के इस तालाब को जानबूझकर खाली करके वहां के पूर्व शासक को आबंटित कर दिया गया है. ऐसे सभी तालाबों को कानूनन फिर से अधिग्रहित करके या उनके आबंटन को निरस्त करके उनके स्थान पर बड़े पेयजल के श्रोत बनाने चाहिए. यदि ऐसा नहीं किया गया तो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ में भी लातूर और मराठवाड़ा जैसे जल संकट का सामना करना पड़ेगा.

श्री जोगी ने यह भी कहा है कि केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की रमन सरकार के पास देश और प्रदेश की आम जनता को मंहगाई, अपराध और भ्रष्टाचार से मुक्त कराने का कोई विजन नहीं है. उनके पास सिर्फ एक सूत्रीय कार्यक्रम है कि जनता पर आए दिन सेस व टैक्स बढ़ाना. पानी के भाव खाली क्षेत्रों में पेट्रोल, डीजल और गैस केरोसिन पर मोदी टैक्स लगाकर आम जनता के जेबें ढीली करना और सोने-चांदी पर भी टैक्सों की भरमार कर महिलाओं को मंगलसूत्र जैसे महत्वपूर्ण गहनों से वंचित कर दिया है.

जहां तक प्रश्न रमन सरकार का है, उसने जनता का खजाना खाली कर दिया है और सरकार ने कर्ज लेकर जनता पर कर्ज का बोझ अलग थोप दिया है. आज प्रदेश में प्रशासन नाम की कोई चीज नहीं रह गई है. गुटखे पर प्रतिबंध लगाया गया पर धड़ल्ले से दुगनी कीमत पर खुले आम बिक रहा है. आबकारी से प्राप्त आय को सरकार कम नहीं करना चाहती. जबकि शराब परिवारों की बरबादी के अलावा दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण है.

इसलिए सरकार को पानी, सड़कों व शराब बंदी पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. यदि वह आम जनता के भले की इच्छुक है. जोगी ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि उन सभी पुराने तालाबों और डबरियों को चिन्हांकित किया जाए, जो पूर्व में पाटकर अन्य कामों के लिए उपयोग किए जा रहे हैं.

जोगी ने यह भी कहा है कि केंद्र की मोदी सरकार और प्रदेश की रमन सरकार के पास देश और प्रदेश की आम जनता को महंगाई, अपराध और भ्रष्टाचार से मुक्त कराने का कोई दृष्टिकोण नहीं है. इनके पास सिर्फ एक सूत्रीय कार्यक्रम है कि जनता पर आए दिन टैक्स बढ़ाना है.

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