छत्तीसगढ़: बाल्को 1000 बेरोजगार होंगे

रायपुर | संवाददाता: बाल्को ने अपने शीट रोलिंग डिवीजन को बंद करने की प्रक्रिया शुरु कर दी है. बाल्को प्रबंधन ने सोमवार को बताया कि उन्होंने केन्द्र सरकार से अपने रोलिंग डिवीजन को 8 आठ दिसंबर, 2015 तक बंद करने की अनुमति चाही है. इससे तकरीबन 1,000 कर्मचारियों को अपने रोजगार से हाथ धोना पड़ेगा. इसमें सीधे तौर पर बाल्को में काम करने वाले कर्मचारी तथा ठेका मजदूर शामिल हैं. पिछले माह ही बाल्को प्रबंधन ने इसकी घोषणा कर दी थी कि एल्युमिनियम के गिरते दाम तथा चीन द्वारा माल डंप कर देने के कारण उसे अपना कोरबा का रोलिंग डिवीजन बंद करना पड़ेगा.

बाल्को ने एक विज्ञप्ति में बताया है कि, ” बाल्को ने अपने कोरबा के शीट रोलिंग डिवीजन तथा फाउंड्री को बंद करने के लिये आधिकारिक प्रक्रिया शुरु कर दी है. कंपनी ने इसकी सूचना बाम्बे स्टाक एक्सचेंज, नेशनल स्टाक एक्सचेंज तथा सचिव, श्रम मंत्रालय, छत्तीसगढ़ शासन को दे दिया है.”

अनिल अग्रवाल की दिग्गज माइनिंग कंपनी वेदांता लि. की बाल्को में 51 फीसदी हिस्सेदारी है और बाकी हिस्सेदारी सरकार के पास है. यहां पर सालाना 30,000 टन एल्युमीनियम शीट्स और कॉइल्स जैसे रोल्ड उत्पादों का निर्माण किया जाता है. सरकार को प्रेषित पत्र में कहा गया कि यूनिट को इंडस्ट्रियल डिसप्यूट्स एक्ट, 1947 के प्रावधानों के तहत बंद किया जाएगा.

दरअसल, बाल्को द्वारा रोलिंग डिवीजन को बंद करने कवायद उसकी रीस्ट्रक्चरिंग का भी हिस्सा है. इस कदम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 1,000 लोग बेरोजगार हो जाएंगे.

बंदी के कारणों पर बालको के सीईओ रमेश नायर ने कहा, ‘वैश्विक स्तर पर एल्युमीनियम की कीमतों में कमी और बिजली संयत्रों को चलाने के लिए महंगा कोयला मिलने के कारण रोलिंग मिल को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की गई है.’ उन्होंने कहा कि दुनिया भर में बिजली की लागत गिर रही है, लेकिन कोयले का लिंकेज नहीं होने से बाल्को के लिए यह अब भी समस्या बनी हुई है.

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