बस्तर: बेटे का शव उठाये भटकता पिता

जगदलपुर | संवाददाता: बस्तर के जगदलपुर में एक पिता अपने बेटे का शव लेकर 4 घंटों तक भटकता रहा. कैसी विडेबना है कि एक पिता को अपने 5 वर्षीय बेटे के शव को अपने घर ले जाने के लिये उसे उठाये हुये घंटों भटकना पड़ा. उसके बाद बस्तर के कमिश्नर के हस्तक्षेप के बाद उसे मुक्तांजलि वाहन मिली जिसके बाद पिता बेटे के शव को लेकर अपने गृहग्राम रवाना हो सका.

जगदलपुर मेडिकाल कॉलेज हास्पिटल में जब दंतेवाड़ा का रहने वाला तुलाराम अपने 5 साल के बीमार बेटे श्रवण को लेकर पहुंचा तब तक उसकी मौत हो गई थी. श्रवण को मलेरिया हो गया था तथा उसकी स्थिति गंभीर होने के कारण उसे दंतेवाड़ा जिला अस्पताल से जगदलपुर मेडिकल कॉलेज रिफर कर दिया गया था. परन्तु अस्पताल पहुंचने के पहले ही बच्चे की मौत हो गई.


उसके बाद मानवता को लज्जित करने वाली घटना घटी. पिता तुलाराम अपने बेटे के शव को दंतेवाड़ा के फुलगट्टा ले जाना चाहता था परन्तु उसकी वहां पर सुनने वाला कोई नहीं था. एक अदद मुक्तांजलि की तलाश में वह बेटे को शव को लेकर बिलखता रहा. कहा जाता है कि पिता के लिये सबसे भारी बेटे का शव होता है और तुलाराम उसी बेटे के शव को लेकर बिलखता हुआ 4 घंटे तक मुक्तांजलि की राह देखता रहा.

छत्तीसगढ़ में मुक्तांजलि वाहनों की सही मॉनिटरिंग न होने से इस तरह की घटनायें पहले भी हो चुकी हैं. दो दिन पहले ही बस्तर के मारडूम में एक 7 माह के बच्चे की अलाव में जलकर मौत हो गई थी. उसका पोस्टमार्टम सुबह के 11 बजे हुआ परन्तु उन्हें मुक्तांजलि के लिये शाम के 5 बजे तक इंतजार करना पड़ा.

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