रमन राज में प्रशासनिक आतंकवाद

रायपुर | संवाददाता: विधानसभा में रमन सिंह सरकार के खिलाफ हंगामा मचाने के बाद कांग्रेस पार्टी ने अब विधानसभा से बाहर भी सरकार के खिलाफ लड़ाई तेज कर दी है. कांग्रेस ने गुरुवार को राज्यपाल से मुलाकात कर रमन सिंह की सरकार पर आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा विधानसभा की कार्यवाहियों एवं समाचार-पत्रों की स्वायत्तता में सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग कर प्रशासनिक दबाव डाला जा रहा है.

नेता प्रतिपक्ष रवींद्र चौबे और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी समेत कांग्रेसियों ने राज्यपाल शेखर दत्त से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा.


कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में कहा कि विधानसभा में जीरम घाटी में मारे गये 32 लोगों की श्रद्धांजलि के अवसर पर कांग्रेस विधायकों के उद्गारों को अघोषित रूप से सेंसरशिप लगाई गई, उनके भाषणों में अनावश्यक रूप से कांट-छांट की गयी एवं प्रकाशित नहीं होने दिया गया. विधानसभा अध्यक्ष ने यह व्यवस्था दी थी कि उनके द्वारा पूरी कार्यवाही के अवलोकन एवं अनुमोदन के पश्चात् ही कार्यवाही विवरण का प्रकाशन एवं प्रसारण किया जा सकेगा.

राज्यपाल को सौंपे ज्ञापन ने कांग्रेस ने आरोप लगाया कि वरिष्ठ नेताओं को श्रद्धांजलि देने के दौरान दिये गये भाषणों को असंसदीय करार दिया जाकर प्रतिवेदनों के कई महत्वपूर्ण अंशो को विलोपित कर दिया गया. कांग्रेस ने इसे सदस्यों के मौलिक अधिकारों का हनन बताते हुये कहा कि विधायक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के तहत निर्वाचित होते है, उन्हें अपनी बातों को सदन के भीतर अभिव्यक्त करने का पूरा अधिकार है, किन्तु राज्य शासन के प्रशासनिक आतंकवाद के कारण ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’अधिकार का हनन किया जा रहा है.

अपने ज्ञापन में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ में सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग किया जा रहा है. शासन में बैठे पदाधिकारियों द्वारा अपने पद एवं प्रभावों का दुरूपयोग कर शासन के अधिकारियों के माध्यम से समाचार पत्रो पर दबाव डाला जा रहा है. प्रदेश के अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से समाचार पत्रों के कार्यालयों में जाकर, कौन सी खबर प्रकाशित करनी है और कौन सी खबर प्रकाशित नहीं करनी है? इस बात का दबाव डाल रहे है, जो कि प्रदेश के समाचार पत्रों की स्वायत्तता पर हमला है एवं लोकतांत्रित व्यवस्थाओं पर सीधा आघात है.

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि 17 जुलाई को सदन की कार्यवाही को कव्हरेज करने के लिये विधानसभा आ रहे पत्रकारों को भी मेन गेट पर ही रोक दिया गया, जबकि उनके पास विधानसभा की कार्यवाही रिकार्ड करने का परिचय पत्र था. कांग्रेस विधायको द्वारा इस मामले में सदन के भीतर आपत्ति किये जाने पर उन पत्रकारों को विधानसभा के भीतर आने दिया गया.

राज्यपाल को लिये गये शिकायत में कांग्रेस ने कहा कि 17 जून को संपन्न विधानसभा के मानसून सत्र में राज्य सरकार ने मात्र दो ही दिन में कुल 16 विधेयक तथा अन्य शासकीय कार्यो को बिना विपक्ष को विश्वास में लिये महज कुछ ही मिनटों में आनन-फानन में पारित करा लिया. राज्य सरकार की जल्दबाजी समझ से परे है, जबकि पूर्व निर्धारित व घोषित समय सारिणी अनुसार विधानसभा का सत्र दिनांक 19.07.2013 को समाप्त होना था. राज्य सरकार द्वारा इन अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में बिना चर्चा कराये व विपक्ष को विश्वास में लिये बिना तथा उनकी अनुपस्थिति में पारित करा लिये गये, जो सर्वथा अनुचित व असंसदीय कार्यप्रणाली है. कांग्रेस ने राज्यपाल से इन विधेयकों पर सहमति नहीं देने का अनुरोध किया है.

जीरम घाटी में 25 मई को हुये नक्सली हमले को लेकर कांग्रेस ने कहा नक्सली हमले पर राज्य सरकार ने प्रशासनिक चूक स्वीकार की है, किन्तु घटना के लगभग 2 माह के बाद भी आज पर्यन्त तक न तो किसी की जवाबदारी तय की गयी है और न ही कोई कार्यवाही की गई है. इतनी बड़ी घटना के बाद राज्य सरकार ने एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग बिठाकर अपनी जिम्मेदारियों से इतिश्री कर ली गयी और इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. इस प्रकार के लचर प्रशासनिक व्यवस्था के कारण ही प्रदेश में लगातार नक्सली घटनाओं में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है और नक्सलियों का प्रभाव क्षेत्र भी बढ़ा है.

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