रेत में जिंदगी उकेरते मूक बधिर बच्चे

रायपुर | संवाददाता: रेत में जिंदगी उकेरना कोई छत्तीसगढ़ के रायपुर के मठपुरैना स्थित शासकीय दृष्टि और श्रवण बाधितार्थ विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों से सीखे. छत्तीसगढ़ सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित इस विद्यालय के बच्चे चंद मिनटों में ही रेत में जीवंत आकृति उकेर देते हैं.

चित्रकारी में भी इनका कोई जवाब नहीं. इनकी रेत की कला और चित्रकारी में प्रकृति का हर रंग दिखाई देता है. चहचहाती चिड़िया, फूलों की खूशबू, बहते हुए झरने, दिए और सूरज की रोशनी, भाई-बहन का प्यार, नाचते गाते लोग, सांझ की बेला सहित जीवन के हर पहलु को सुदंर और आकर्षक रंगों से रंग देते हैं इस स्कूल के प्रतिभाशाली मूक-बधिर बच्चे.


भले ही मूक बधिर बच्चे बोल-सुन नहीं पाते पर अपनी भावनाओं को प्राकृतिक और जीवंत चित्रकारी के माध्यम से प्रकट करने में माहिर हैं ये. यह उल्लेखनीय है कि रेत की कला और चित्रकारी सिखाने वाले शुभेन्द सिंह चौहान स्वयं भी मूक बधिर हैं, इसके बाद भी वे बड़ी कुशलता और लगन से बच्चों को इन कलाओं का प्रशिक्षण दे रहे हैं.

छत्तीसगढ़ के शासकीय दृष्टि और श्रवण बाधितार्थ विद्यालय के अधीक्षक अशोक तिवारी ने बताया कि इस स्कूल में कुल 230 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं. इनमें 165 दृष्टि बाधित और 65 मूक-बधिर बच्चे शामिल हैं. उन्होंने बताया कि स्कूल में 112 बालिकाएं और 118 बालक विभिन्न कक्षाओं में अध्ययनरत हैं. यहां का हर बच्चा किसी न किसी विधा में माहिर हैं.

ये निःशक्त बच्चे पढ़ाई-लिखाई करने के साथ आगे चलकर आत्मनिर्भर बन सके, इसके लिए उन्हें गायन-वादन, चित्रकारी, सिलाई-कढ़ाई, ग्रीटिंग कार्ड, क्राफ्ट, मूर्तिकला सहित अनेक कलाओं का प्रशिक्षण दिया जाता है. इस विद्यालय के अन्तर्गत दृष्टिबाधितों के लिए कक्षा पहली से कक्षा 12 वीं तक और मूक-बधिर बच्चों के लिए कक्षा पहली से आठवीं तक की कक्षाएं संचालित हैं.

वर्तमान में रायपुर से बाहर के 80 बच्चे इस छात्रावास में रह रहे हैं. छात्रावास में बच्चों के आवास, वस्त्र, भोजन, पुस्तक-कापी आदि की सुविधा ऩिःशुल्क है, जबकि रायपुर में निवासरत बच्चों को स्कूल का वाहन प्रतिदिन उनके घर से लेने और पहुंचाने जाता है. वाहन सुविधा भी निःशुल्क है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!