भाजपा का घोषणापत्र लेकर हाईकोर्ट पहुंचे किसान

बिलासपुर | संवाददाता: 25 दिनों आमरण अनशन और 280 किलोमीटर की पदयात्रा के बाद सैकड़ों किसान मंगलवार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंचे. यहां किसानों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की. किसानों की एक ही मांग थी कि छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार अपनी घोषणापत्र का पालन करे, जो उसने चुनाव के समय जारी किया था. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने इस संबंध में पखवाड़े भर के भीतर विधिक सेवा प्राधिकरण से राय देने को कहा है.

किसानों के अपनी तरह के इस आंदोलन की शुरुआत गणतंत्र दिवस के अगले ही दिन से महासमुंद जिला मुख्यालय से हुई. भाजपा सरकार ने 2013 के चुनाव में जो घोषणा पत्र जारी किया था, उसे पूरा करनं की मांग को लेकर पांच किसान आमरण अनशन पर बैठे. 8 दिनों तक किसानों के इस आमरण अनशन के दौरान सरकार का एक अदना अफसर भी झांकने नहीं आया. अंततः किसानों ने तय किया कि वे अब सरकार के बजाये न्यायपालिका से अपनी मांगों की गुहार लगायेंगे.


इसके बाद किसानों ने महासमुंद से बिलासपुर तक आमरण अनशन के साथ पद यात्रा की शुरूआत की. अन्न त्याग चुके 5 किसानों ने 7 फरवरी से भूखे ही पैदल चलना शुरू किया. किसानों का दल आता गया, जुड़ता गया और जगह-जगह किसानों के समर्थन में आयोजन होते रहे. लगातार 24 दिन भूखे रहकर 280 किलोमीटर की पदयात्रा के बाद किसानों का यह दल 20 फरवरी को बिलासपुर पहुंचा.

प्रदेश भर से पहुंचे 500 से ज्यादा किसान मंगलवार की सुबह बिलासपुर के मल्टीपर्पज स्कूल के पीछे एकत्र हुए. दोपहर 12 बजे पद यात्रा शुरू हुई, जो शहर से होकर हाईकोर्ट पहुंची. मौन प्रदर्शन के बीच किसानों ने हाईकोर्ट को वह मांग पत्र सौंपा, जिसे उन्होंने 5 फरवरी को रजिस्टर्ड डाक से सुप्रीम और हाईकोर्ट को भेजा था. किसानों की मांग थी कि पत्र को जनहित याचिका के तौर पर स्वीकार कर सुनवाई की जाए. हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने किसानों के प्रतिनिधिमंडल से चर्चा की और फिर किसानों का अनशन भी तुड़वाया. हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को पखवाड़े भर में राय देने को कहा है.

किसानों के आंदोलन पर सरकार की चुप्पी
30 से 60 साल उम्र के हजारों किसानों ने इस आंदोलन में हिस्सेदारी निभाई लेकिन किसानों की सरकार होने का दावा करने वाली भाजपा और उसके नेता इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे रहे. महासमुंद से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन, पदयात्रा में तब्दील होकर झलप, पटेवा, बसना, सरईपाली, सारंगढ़, सरसींवा, भटगांव, शिवरीनारायण, पामगढ़, मस्तूरी होते हुए बिलासपुर पहुंची. बीते 25 दिनों में आंदोलन प्रदेश के आधा दर्जन से ज्यादा जिलों तक पहुंचा. हर जिले के किसानों ने आंदोलन में सहभागिता निभाई और आंदोलनकारियों की संख्या बढ़ती गई.

रमन सरकार अपना वादा निभाए
आमरण अनशन करने वाले राधेश्याम शर्मा-रायगढ़, जोगश्वर चंद्राकर-बकमा (महासमुंद), गजेंद्र कोसले-सोनपैरी (रायपुर), तिलकराम साहू-झिलमिला (महासमुंद), कौशल देवांगन-झलप (महासमुंद) और लोकनाथ नायक ने कहा कि हमारी मांग बस इतनी है कि रमन सरकार अपने 2013 के घोषणा पत्र का परिपालन करे. आंदोलनकारियों ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी घोषणा पत्र में सरकार बनते ही धान पर बोनस देने का वादा किया था. किसानों को बीते दो सालों का बोनस नहीं दिया जा रहा है.

आंदोलनकारी नेताओं ने कहा कि सरकार ने धान का दाना-दाना समर्थन मूल्य पर खरीदने का वादा किया था. अब प्रति एकड़ 15 क्विंटल की खरीदी हो रही है. भाजपा ने किसानों से मुफ्त बिजली का वायदा किया, लेकिन अब सीमा तय कर दी गई है. फसल बीमा की राशि किसानों से दो-दो बार वसूला गया. पहले सोसायटी में धान बिक्री के समय और फिर केसीसी बनवाते समय बैंकों से. निजी बीमा कंपनियों को 400 रुपए की जगह 800 रुपए प्रति किसान के हिसाब से प्रीमियम दिया गया. इसके बाद भी किसानों को बीमा का लाभ नहीं मिला. सूखे से प्रभावित किसानों को क्षतिपूर्ति ही नहीं दी गई.

विपक्ष में लड़ाई और सरकार में आते ही भूल गई वादा

आंदोलनकारी राधेश्याम शर्मा ने भारतीय जनता पार्टी पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया. उन्होंने बताया कि किसानों के लिए बनी स्वामीनाथन कमेटी ने वर्ष 2011 में अपनी रिपोर्ट दे दी. इसे सदन में पेश कर दिया गया. उस दौरान भारतीय जनता पार्टी विपक्ष में थी, लिहाजा रिपोर्ट पर अमल करने किसानों के साथ खड़ी रही. अब भाजपा सत्तारुढ़ पार्टी है, तो इस पर चर्चा भी नहीं कर रही. सरकार को किसानों की चिंता है तो फिर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में कैद क्यों है? उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों में ही भारतीय जनता पार्टी की सरकार है लेकिन दोनों जगहों पर चुप्पी है. इसके उलट केंद्र सरकार ने तो सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दे दिया है कि उसके लिये कमेटी की रिपोर्ट का पालन संभव नहीं है.

राधेश्याम शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार को किसानों की फसलों का लाभांतर देना चाहिये साथ ही उसे किसानों के लिये एक आय आयोग बनाना चाहिये. उन्होंने कहा कि इन उपायों के बिना किसानों का भला नहीं हो सकता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!