लाल गढ़ में बढ़ा पुलिस पैकेज

रायपुर | जेके कर: छत्तीसगढ़ नक्सल इलाकों में पुलिस के लिये सलाना 121 करोड़ रु. अतिरिक्त खर्च करेगा. जिसके तहत सहायक आरक्षकों का मासिक वेतन 8,990 से बढ़ाकर 14,144 रूपए किया जाएगा. इसी तरह से सहायक आरक्षकों और गोपनीय सैनिकों को भी 25 लाख रूपए की बीमा सुरक्षा मिला करेगी. इसका लाभ छत्तीसगढ़ के करीब 22 हजार पुलिसकर्मियों को मिलेगा. आकड़े गवाह है कि देश भर में छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर सबसे ज्यादा पुलिस वाले मारे जाते हैं.

साल 2005 से लेकर 28 जून, 2015 तक देश भर में नक्सली मुठभेड़ में 1765 सुरक्षाकर्मी मारे गये हैं. जिसमें से अकेले छत्तीसगढ़ में 858 सुरक्षाकर्मी मारे गये हैं. इस प्रकार से छत्तीसगढ़ में ही 49 फीसदी सुरक्षाकर्मी नक्सली मुठभेड़ में मारे गये हैं.

31 दिसंबर, 2013 तक के आकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में 48,687 पुलिस कर्मी पूरे प्रदेश में तैनात थे. जिनमें से 16,428 सशस्त्र बल के थे. छत्तीसगढ ने इसी साल पुलिस बल पर 1598.10 करोड़ रु. खर्च किये गये. इस तरह से प्रति पुलिस कर्मियों पर छत्तीसगढ़ में 3 लाख 28 हजार 240 रुपये सालाना खर्च किये गये.

छत्तीसगढ़ की तुलना में साल 2013 में गोवा ने सालाना प्रति पुलिस वाले पर 4 लाख 13 हजार 173 रु, हरियाणा ने 4 लाख 38 हजार 547 रु, झारखंड ने 3 लाख 81 हजार 709 रु तथा उत्तर प्रदेश ने 4 लाख 37 हजार 927 रु खर्च किये थे.

साल 2013 में देश भर में प्रति पुलिस वाले पर किये गये खर्च का औसत 3 लाख 28 हजार 828 रु. खर्च किये गये थे जो करीब-करीब छत्तीसगढ़ के बराबर का रहा है.

वहीं, साल 2013 में उग्रवाद से प्रभावित नगालैंड ने 6 लाख 39 हजार 018 रु, मिजोरम ने 3 लाख 33 हजार 551 रु तथा जम्मू-कश्मीर ने 3 लाख 17 हजार 656 रु खर्च किये थे (जम्मू-कश्मीर में सेना बड़ी संख्या में तैनात है). इन आकड़ों से जाहिर है कि उग्रवाद से प्रभावित नगालैंड तथा मिजोरम ने छत्तीसगढ़ की तुलना में अपने पुलिस बल पर ज्यादा खर्च किये थे. जबकि पूरे उत्तर-पूर्व के राज्यों में आतंकी गतिविधियों के कारण सुरक्षा बलों के 469 जवान मारे गये हैं. यह संख्या भी 28 जून, 2015 तक का है जिसकी तुलना में छत्तीसगढ़ में 858 सुरक्षाकर्मी मारे गये.

आकड़ों से जाहिर है कि छत्तीसगढ़ में पुलिस बलों पर तुलनात्मक रूप से कम खर्च किया जाता रहा है.

इस जमीनी हकीकत के बावजूद छत्तीसगढ़ सरकार का नक्सली मोर्चे पर तैनाल पुलिस वालों का वेतन, भत्ता तथा सामाजिक सुरक्षा बढ़ाया जाना निश्चित तौर पर सराहनीह कदम है.

छत्तीसगढ़ कैबिनेट का निर्णय-
बस्तर संभाग के सभी जिलों में नक्सल हिंसा और आतंक के खिलाफ मोर्चे पर तैनात राज्य पुलिस के जवानों और सहायक आरक्षकों के हित में कई अहम फैसले किए हैं. सहायक आरक्षकों का मासिक वेतन विभिन्न भत्तों सहित कुल 8,990 रूपए से बढ़ाकर 14,144 रूपए करने का भी निर्णय लिया गया है. सहायक आरक्षकों और गोपनीय सैनिकों को भी अब पुलिस जवानों की तरह 25 लाख रूपए की बीमा सुरक्षा दी जाएगी. अब तक उन्हें केवल पांच लाख रूपए की बीमा योजना का लाभ मिलता था. उनका मनोबल बढ़ाने के लिए उन्हें भी 25 लाख रूपए की बीमा सुरक्षा दी जाएगी.

समस्त वेतन एवं भत्ते एक जुलाई 2015 से लागू किए जाएंगे.

वर्तमान में बस्तर संभाग के जिलों में पुलिस बल को रूपए 650 प्रति माह राशन भत्ता एक जनवरी 2006 से दिया जा रहा है, जिसे लगभग दस वर्ष हो गए हैं. इसी प्रकार राज्य के स्पेशल टॉस्क फोर्स को 30 मार्च 2013 से रूपए 1200 प्रति माह राशन भत्ता दिया जा रहा है. मंत्रिपरिषद ने निर्णय लिया कि बस्तर संभाग के सभी जिलों के पुलिस बल के साथ-साथ सहायक आरक्षकों और गोपनीय सैनिकों को भी रूपए 2000 प्रतिमाह राशन भत्ता दिया जाएगा. स्पेशल टॉस्क फोर्स को भी रूपए 1200 के स्थान पर रूपए 2200 प्रति माह राशन भत्ता दिया जाएगा. इस पर लगभग 35 करोड़ 31 लाख रूपए वार्षिक व्यय आएगा.

नक्सल क्षेत्र भत्ता वर्तमान में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कार्यरत पुलिस बल को मूल वेतन का 20 प्रतिशत एवं 15 प्रतिशत नक्सल ड्यूटी भत्ता थानावार दिनांक 17 जुलाई 2009 से दिया जा रहा है. मंत्रिपरिषद ने राज्य पुलिस बल के लिए नक्सल क्षेत्र भत्ता तीन स्तरों पर देने का निर्णय लिया. अति संवेदनशील क्षेत्रों में 50 प्रतिशत, संवेदनशील क्षेत्रों में 35 प्रतिशत और सामान्य प्रभावित क्षेत्रों में 15 प्रतिशत नक्सल ड्यूटी भत्ता दिया जाएगा. यह भत्ता थानेवार वर्गीकृत किया जाएगा और यह वर्ष 2018-19 तक के लिए दिया जाएगा. इसे 31 मार्च 2019 के पहले समीक्षा कर आगे बढ़ाने के बारे में विचार किया जाएगा.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि सभी जवानों और सहायक आरक्षकों को अच्छी क्वालिटी के रूपए 2000 के जूते और एक हजार रूपए मूल्य के अच्छी क्वालिटी के बैग साल में एक बार संबंधित पुलिस अधीक्षकों के माध्यम से दिए जाएंगे. इसके पहले तक उन्हें केवल 500 से 700 रूपए कीमत के जूते दिए जाते थे. अब उन्हें अच्छी क्वालिटी के जूते प्रदान किए जाएंगे.

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