छत्तीसगढ़ में नई रेल लाइनों की सहमति

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ में कोरबा से धर्मजयगढ़ तथा रावघाट से जगदलपुर तक रेल लाइन बिछाने पर सहमति बन गई है. छत्तीसगढ़ के पिछडे़ और विकास से वंचित इलाकों में रेलवे का विस्तार छत्तीसगढ़ की प्रगति और विकास के इंजन की भूमिका अदा करेगा. केन्द्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के बीच हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में बस्तर को देश के मुख्य भाग से जोड़ने और छत्तीसगढ़ के उत्‍तरी इलाकों में रेलवे लाईन के विस्तार के सम्बंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये.

बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने ईस्ट कॉरिडोर खरसिया और धर्मजयगढ़ के बीच चल रहे कार्य को धर्मजयगढ़ से कोरबा तक 60 किलोमीटर और बढ़ाने के प्रस्ताव पर स्वीकृति की मांग की. उन्होंने कहा कि, इस क्षेत्र के संसाधनों के विकास और जनसाधारण को रेल यात्री सुविधा उपलब्ध कराने के लिए यह रेलवे लाईन अति आवश्यक है. केन्द्रीय रेल मंत्री ने इस रेल लाईन के निर्माण को महत्वपूर्ण बताते हुए इसके विस्तार पर अपनी सहमति प्रदान की.


बैठक में मुख्यमंत्री ने दल्लीराजहरा – रावघाट रेलवे लाईन के द्वितीय चरण में रावघाट से जगदलपुर 140 किलोमीटर तक विस्तारित करने की मांग की. उन्होंने कहा कि, इस लाईन के बन जाने से बस्तर का पिछड़ा भू-भाग देश के मुख्य भाग से जुड़ जायेगा और इस पूरे क्षेत्र में विकास और प्रगति का एक नया दौर प्रारम्भ होगा.

केन्द्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि, बस्तर का विकास नई सरकार की प्राथमिकता है. उन्होंने इस रेलवे लाईन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए इस पर अपनी सहमति देते हुए शीघ्र ही एस.पी.वी. बनाने के निर्देश दिये. उन्होंने रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों को सेल और एनएमडीसी के साथ शीघ्र एक बैठक आयोजित करने के भी निर्देश दिये.

बैठक में मुख्यमंत्री ने रायपुर से बलौदा बाजार होते हुए झारसुगड़ा तक 310 किलोमीटर रेलवे लाईन के निर्माण की भी मांग की. उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव 2013-14 के रेल बजट में स्वीकृत है. बैठक में मुख्यमंत्री ने अंबिकापुर से बारवाडीह 182 किलोमीटर और डोंगरगढ़-खैरागढ़-कवर्धा-मुंगेली-बिलासपुर 234 किलोमीटर रेलवे लाईन निर्माण के प्रस्ताव भी रेल मंत्री को दिये है. उन्होंने जोर देकर कहा कि, छत्तीसगढ़ का बिलासपुर जोन देश में रेलवे को सबसे ज्यादा राजस्व देता है. उसके मुकाबले छत्तीसगढ़ में रेलवे का घनत्व बहुत कम है इस असंतुलन को दूर करने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ में बिलासपुर, दुर्ग, अंबिकापुर और कोरबा ही टर्मिनल है, इसे विस्तारित कर रायगढ़, जगदलपुर, डोंगरगढ़ और उसलापुर को नये टर्मिनल के रूप में विकसित किया जाये.

बैठक में केन्द्रीय रेलवे मंत्री ने नया रायपुर में विकसित किये जा रहे कंटेनर डिपो के साथ साथ रेलवे के कार्गो हब को भी विकसित करने का प्रस्ताव दिया. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अगर जमीन उपलब्ध करा दे तो इस कार्गो हब को विकसित करने का पूरा विभागीय व्यय रेलवे मंत्रालय उठायेगा. मुख्यमंत्री ने इस पर सहर्ष अपनी स्वीकृति प्रदान की.

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