35 नर्सिंग होम को सशर्त लाइसेंस

कोरबा | अब्दुल असलम: छत्तीसगढ़ के कोरबा में नर्सिंग होम एक्ट के तहत कलेक्टर ने 35 अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब को लाइसेस जारी कर दिया है. जबकि 32 अस्पतालों का लाइसेंस कलेक्टर कार्यालय में लटका हुआ है. इस लिहाज से जिले में 32 अस्पतालों का संचालन गैर कानूनी ढग़ से किया जा रहा है. जिन्हें लाइसेंस दिया गया है. उनमें भी काफी कमियां हैं. पहले उन्हें अस्थाई लाइसेंस दिया गया. लेकिन अब उनके लाइसेंस को सशर्त पांच साल के स्थाई कर दिया गया है. जबकि अस्पतालों में सुविधा के नाम पर कुछ भी काम नहीं हुआ है. नर्सिंग एक्ट के मुताबिक मापदंड में ये अस्पताल खरे नहीं उतरते. इसके बावजूद भी लाइसेंस दे दिया गया है.

छत्तीसगढ़ में अगस्त 2013 से जिले में नर्सिंग एक्ट लागू है. इसके तहत अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब की जांच कर स्वास्थ्य विभाग ने एक रिपोर्ट तैयार की थी. जिसमें विभाग ने 67 हॉस्पीटल, नर्सिंग होम क्लीनिक और पैथोलॉजी को एक्ट के मानकों पर खरा पाया था. इनकों लाइसेंस जारी करने के लिए छ: माह पहले स्वास्थ्य विभाग ने कलेक्टर को पत्र लिखा था. लेकिन इन्हे लाइसेंस जारी नहीं किया गया था. आखिर 35 हास्पीटल नर्सिंग होम क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब को नर्सिंग एक्ट के तहत लाइसेंस जारी कर दिया गया है. लाइसेंस पांच साल के लिए जारी की गई है. 32 अस्पतालों का लाइसेंस रोक दिया गया है. जिनका वर्तमान में संचालन गैर कानूनी है.

कैसे हो गया स्थाई

छत्तीसगढ़ नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधान में साफ है कि पहले अस्पतालों को अस्थाई लाइसेंस जारी किया जाएगा. लेकिन जब तक व्यवस्थाएं दुरूस्त नहीं की जाती इन्हें स्थाई नहीं किया जाएगा. जिले के अधिकांश अस्पताल नर्सिंग होम एक्ट के मानक पर खरे नहीं उतरते. कहीं पार्किंग तो कहीं रैप, आपरेशन थियेटर, प्रशिक्षित स्टॉफ, सर्वसुविधा युक्त वार्ड की कमी है. इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने आंख मूंदकर 67 अस्पतालों को लाइसेंस के लिए कलेक्टर कार्यालय भेज दिया. जिन्हें सीधे पांच साल के लिए लाइसेंस जारी कर दिया गया. जबकि अस्पतालों में नर्सिंग होम एक्ट के तहत कोई भी सुविधा मौजूद नहीं है.

32 को भी दे देगें
कलेक्टर कार्यालय में जो 32 अस्पतालों के फाइल लाइसेंस के लिए लटके हुए है. उन्हें भी शीघ्र ही लाइसेंस दे दिया जाएगा. इस बात में कोई हैरत नहीं होनी चाहिए. क्योंकि प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य विभाग द्वारा भेजे गए अस्पतालों की जांच नहीं की गई है. आंख मूंदकर प्रशासन बिना सुविधा वाले अस्पतालों को भी लाइसेंस जारी कर नर्सिंग एक्ट की खिल्ली उड़ा रहा है.

सशर्त दिया गया लाइसेंस
अस्पतालों को लाइसेंस सशर्त प्राप्त की गई है. इसका उल्लघंन करने पर लाइसेंस निरस्त हो सकता है. अस्पतालों के खिलाफ सीधे परिवेक्षी अधिकारी व कलेक्टर से की जा सकती है. एक्ट के किए गए प्रावधान के तहत 24 घंटों के भीतर जांच होगी. विभाग एक्ट का उल्लघंन पाता है तो लाइसेंस निरस्त करने की मांग करेगा.

क्या है मुख्य शर्ते

1. पांच साल तक मरीजों का रिकार्ड रखना होगा.
2. संक्रामक बीमारी की जानकारी 24 घंटे में देने होगी.
3. लाइसेंस को अस्पताल के सूचना पटल पर चस्पा करना होगा.
4. इलाज की गोपनियता बनाई रखनी होगी.
5. संक्रमण बीमारियों की मासिक रिपोर्ट तैयार करना होगा.
6. प्रशिक्षित स्टॉफ की तैनाती जरूरी, आदि.

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