छत्तीसगढ़: स्वाभिमान से जी रही सुल्ताना

कोरबा | समाचर डेस्क: शौहर से तलाक हो जाने के पश्चात अपने एक बच्चे की परवरिश और खुद का खर्च उठाने की फिक्र ने सुल्ताना बेगम को कई बुरे दिन दिखाए. अपने अब्बा और अम्मी के साथ रहते हुए वह परिवार में बोझ नहीं बनना चाहती थी. अपने हुनर की बदौलत जो कुछ संभव था, उस कार्य के सहारे घर का आर्थिक सहयोग करना चाहती थी. उसके लिये घर से बाहर जाकर कार्य कर पाना भी आसान नहीं था. ऐसे में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महिलाओं को सिलाई मशीन देने की योजना सुल्ताना के भविष्य का आधार बनी. निःशुल्क सिलाई मशीन मिलने और गांव में ही सिलाई प्रशिक्षण मिलने से टेलरिंग का काम करके अपनी जरूरत का खर्च निकाल रही है. इस कार्य में भले ही अधिक आमदनी नहीं होती, लेकिन टेलरिंग के कार्य में ध्यान देने से उसे अपने बेहतर भविष्य को लेकर नई उम्मीदें है.

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के विकासखण्ड पोड़ीउपरोड़ा अंतर्गत ग्राम जटगा की सुल्ताना बेगम ने बताया कि वह ज्यादा नहीं पढ़ी है, इसलिए बाहर नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सकती. शौहर से तलाक हो जाने के पश्चात एक बच्चे के साथ खुद के जीवन यापन की जिम्मेदारी थी. बचपन से गरीबी देखती आई सुल्ताना ने बताया कि उनके पास कोई पैतृक पूंजी भी नहीं थी, कि तत्काल कोई कदम उठा सके. ससुराल से अम्मी अब्बा के घर पहुंचने के बाद खुद को खाली बैठना अच्छा नहीं लगता था. वह कुछ करना चाहती थी.
सुल्ताना ने बताया कि एक दिन गांव में पता चला कि सरकार महिलाओं को सिलाई मशीन देने वाली है, इसके लिए नाम जोड़ा जा रहा है. उसने भी सरपंच के माध्यम से संपर्क कर पूरी जानकारी हासिल की. आखिरकार उनका नाम भी जुड़ गया और सिलाई मशीन भी मिल गई. सुल्ताना ने बताया कि उसे टेलरिंग का प्रशिक्षण भी मिला , वह अब घर पर ही सलवार सूट, ब्लाउज सिलती है. उसने बताया कि सूट का 100 से 150 रूपये, ब्लाउज का 100 रूपये तक लेती है.


सुल्ताना कहती है कि गांव होने की वजह से अधिक काम नही मिल पाती, फिर भी महीने भर में उसके जरूरत के लिए आमदनी हो जाती है. वह चाहती है कि शासन से कुछ सहायता मिले तो गांव की कुछ दूसरी महिलाएं भी मिलकर टेलरिंग के क्षेत्र में बड़ा कार्य कर सकती है.

सुल्ताना का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बुरे वक्त पर सिलाई मशीन दिये जाने से ही वह स्वाभिमान के साथ अपने अम्मी के घर पर रह पा रही है.

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