छत्तीसगढ़: संकट में पहाड़ी कोरवा

कोरबा | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ में पहाड़ी कोरवा मौसमजनित बीमारियों से जूझ रहें हैं. वहां मलेरिया, पीलिया तथा अन्य मौसमी बीमारियों को लेकर जिले का स्वास्थ्य विभाग जो दावे कर रहा है उन दावों की हकीकत सरकारी नज़रिये के ठीक उलट है.

बालको क्षेत्र के कई गावों में मलेरिया का प्रकोप है. बालको के तापर, बेलाकछार, नकटीखार में मौत के मामले सामने आये है. अब संरक्षित जनजाति और राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र पहाड़ी कोरवा मौसमी बीमारी से पीड़ित है.

बालको के फुठामुड़ा की कोरवा बस्ती खुसर बाहरी में एक महीने के भीतर एक ही घर में 2 लोगों की मौतें हो गई. बस्ती में लगाये गये हैंडपंप लाल पानी उगल रहें है. पहाड़ी कोरवा ढोढ़ी के दूषित पानी से अपनी प्यास बुझाने को मजबूर है.

यहाँ की तिहारो बाई बुखार से तप रही है जिसने कल ही अपने उस मासूम का कफ़न दफ़न किया. जिसे सरकार का मुफ्त इलाज नसीब नही हुआ. कोरबा तक आने के लिए इनके पास पैसे नहीं.

जिले की सेहत सुधरने वाला अमला हर रोज 100 से 150 शिविर लगाने का दावा कर रहा है. लेकिन इन कोरवाओं को आज भी इलाज़ के लिए चिकित्सकों का इंतजार है.

उल्लेखनीय है कि कोरबा जिले में 610 से अधिक पहाड़ी कोरबा परिवार हैं. कोरबा विकासखंड में 590 परिवार दुर्गम इलाकों में वास करते हैं, जहां इनके रहन-सहन की शैली कई परंपराओं से बंधी है. कोरबा परिवारों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की पहल निरंतर जारी है.

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