ज़मीन माफिया अफसरों पर कार्रवाई नहीं

संवाददाता | रायगढ़: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में ज़मीन घोटाले में सरकारी अफसरों को बचाने की कोशिश जारी है. अरबों रुपये के एनटीपीसी लारा के सरकारी मुआवजे के घोटाले में कलेक्टर मुकेश बंसल भले लाख कार्रवाई करने का दावा करें लेकिन हक़ीकत ये है कि इस पूरे मामले में अब तक जिन सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को जेल के भीतर होना था, वे मज़े से नौकरी कर रहे हैं. कलेक्टर रिपोर्ट को सरकार को सौंपने की बात कह कर पल्ला झाड़ रहे हैं.

गौरतलब है कि पिछले पखवाड़े अकेले एक गांव में ज़मीन के फर्जीवाड़ा के 1406 मामले सामने आये हैं. मामला पुसौर विकाखंड के लारा में नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन के 4000 मेगावॉट बिजली संयंत्र के लिये किये गये ज़मीन अधिग्रहण का है.

इस पावर प्लांट के लिये 9 गांवों की 924.334 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण शुरु हुआ और मुआवज़ा देने की प्रक्रिया शुरु हुई तो एनटीपीसी के अफसर चकरा गये. जिस ज़मीन के लिये बमुश्किल 5 लाख रुपये मुआवजा देना था, उस ज़मीन के बदले एनटीपीसी को कई करोड़ रुपये देने पड़ गये.

ज़मीन की क़ीमत के अलावा एनटीपीसी की पुनर्वास नीति के अनुसार प्रभावित को पांच लाख रुपये बतौर मुआवजा भी दिया जाना था.

हुआ ये कि जिन ज़मीनों का एनटीपीसी ने अधिग्रहण शुरु किया, पांच लाख रुपये के मुआवजे के लिये किसानों ने उन ज़मीनों को छोटे-छोटे टुकड़ों में अपने रिश्तेदारों और परिचितों के नाम कर दिया.

उदाहरण के लिये किसी किसान की अगर एक एकड़ यानी लगभग 43560 वर्गफीट ज़मीन का अधिग्रहण किया जाना था तो उस किसान ने अपनी ज़मीन को पांच-पांच सौ वर्गफीट के टुकड़े में काट कर 70-80 लोगों को बेच दिया या रिश्तेदार हुये तो मुफ्त में उनके नाम ज़मीन की रजिस्ट्री करा दी.

एक एकड़ ज़मीन के लिये अगर 10 लाख रुपये ज़मीन की क़ीमत और 5 लाख रुपये मुआवजे की रक़म यानी कुल 15 लाख रुपये का भुगतान किया जाना था, उसके बदले एनटीपीसी को केवल मुआवजे के बतौर चार करोड़ का भुगतान करना पड़ गया.

एनटीपीसी में मुआवजे के इस फर्जीवाड़े की जांच कर रहे रायगढ़ के एसडीएम रजत बंसल का कहना है कि हम फिलहाल नौ गांवों में ज़मीन मुआवजे के फर्जीवाड़े की जांच कर रहे हैं और अकेले झिलगीटार गांव में हमने ज़मीन के 1406 मामलों में फर्जीवाड़ा पाया है और इसे निरस्त करने की प्रक्रिया शुरु कर दी है.

रजत बंसल का कहना है कि झिलगीटार के अलावा लारा, देवलसुर्रा, आरमुड़ा, बोडाझरिया, कांदागढ़, छपोरा, महलोई एवं रियापाली गांव की भी जांच चल रही है और इन गांवों में भी ऐसे मामले बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं. भ्रष्टाचार का यह मामला कई सौ करोड़ का हो सकता है.

इन गांवों में कई ज़मीनों के टुकड़े तो एनटीपीसी में काम करने वाले लोगों के ऐसे रिश्तेदारों के नाम पर भी हैं, जो छत्तीसगढ़ में नहीं रहते. कई ज़मीन अधिग्रहण में लगे सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के रिश्तेदारों के नाम पर हैं.

जाहिर है, इस बड़े फर्जीवाड़े में ज़िले के कई आला अधिकारी शामिल हैं. कहा तो यह भी जा रहा है कि इन अफसरों ने मामला खुलने के बाद राजनीतिक दबाव भी बनाना शुरु किया है. लेकिन माना जा रहा है कि ज़मीन घोटाले के इस मामले को देर-सबेर अदालत में जाना ही होगा और ऐसा होने पर कुछ अफसर तो जेल की चक्की पीसेंगे ही.

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