बजट: “कुछ का साथ, कुछ का विकास”

रायपुर | संवाददाता: देश की जनता के लिये अच्छे दिन लाने का वादा करने वाली सरकार ने शनिवार को अपना बजट पेश किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आम बजट प्रगतिशील और व्यावहारिक है, जिससे रोजगार का सृजन होगा, समानता आएगी और विकास होगा. मोदी ने शनिवार को ट्विटर पर लिखा, “आम बजट 2015 स्पष्ट दृष्टिकोण वाला बजट है. यह प्रगतिशील, सकारात्मक, व्यावहारिक, तथ्यात्मक और विवेकशील है.” हमने कोशिश की कि छत्तीसगढ़ की जनता इस आम बजट पर क्या सोचती है उसकी पड़ताल की जाये.

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रहने वाले छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते ने कहा, ” यदि लोकलुभावन नारों को हटा दिया जाये तो यह बजट पूर्ण रूप से एक कॉर्पोरेटीय बजट है. इस बजट में कॉरर्पोरेट टैक्स को 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी करना प्रस्तावित है जिसका सीधा अर्थ है कि कॉर्पोरेट घरानों को 5 फीसदी की सीधी छूट दी जा रही है.” उन्होंने आगे बताया कि, “इसकी तुलना में उच्च मध्यम वर्ग के लोगों की आय 10 लाख रुपये से ऊपर होने पर वहीं 30 फीसदी की दर से आयकर देना होगा. एक तरफ कॉरर्पोरेट टैक्स को कम किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर आयकर को कम करने के बजाये यथावत रखा जा रहा है.”


इसी तरह से छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर के रहने वाले रेल कर्मचारियों के नेता रवि बनर्जी ने इस बजट को कॉरर्पोरेट बजट बताया जिसमें उनको लगने वाले टैक्स को घटाये जाने का प्रस्ताव है जबकि आम जनता अपने आयकर के बोझ को कम किये जाने की राह देख रही थी.

जाहिर है कि इससे कॉर्पोरेट घरानों पर पड़ने वाला बोझ कम होगा तथा उनके पास से टैक्स के रूप में सरकार के खजाने में कम धन जायेगा. जिस राष्ट्र निर्माण की बात की जा रही है उसमें बड़े घरानों की हिस्सेदारी घट जायेगी जबकि उनकी आय बढ़ने जा रही है.

वायदा बाजार आयोग का सेबी में विलय करने के प्रस्ताव पर संजय पराते ने कहा, ” सरकार एक तरफ वायदा बाजार को जारी रखने जा रही है जिसके कारण जिंसों के दाम बढ़े हैं वहीं दूसरी तरफ सट्टा बाजार को बंद करने की बात की जा रही है. ” उन्होंने वायदा बाजार को एक तरह का सट्टा ही बताया. पराते ने कहा, ” वायदा बाजार कालेधन को बढ़ावा देगा जिसको सेबी में विलय करने की बात की जा रही है. इससे कालाधन शेयर बाजार में प्रवेश करेगा तथा सेंसेक्स में उछाल आयेगा. जिसका दावा देश के अर्थव्वस्था में उछाल से किया जायेगा. जबकि वास्तव में वह कालाधन ही होगा.”

जाहिर सी बात है कि वायदा बाजार आयोग का सेबी में विलय करने से कालेधन को वैधता मिलेगी. उल्लेखनीय है कि इसी सरकार ने विदेशों से कालाधन वापबस लाने का वादा किया था. बजट प्रस्तावों पर चर्चा करते हुए संजय पराते ने बताया, ” प्रत्यक्ष करों में वसूली पिछले साल की तुलना में 8315 करोड़ की कम दिखाई जा रही है जबकि अप्रत्यक्ष करों की वसूली पिछले साल की तुलना में 23,000 करोड़ रुपये ज्यादा करने का प्रस्ताव है.” छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते ने सवाल किया, ” फिर सब्सिडी किस ओर जा रही है?”

शुक्रवार को संसद में साल 2014-15 का आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया गया था जिसके अनुसार देश के सकल घरेलू उत्पादन में 8 फीसदी की दर से बढ़ोतरी होने जा रही है. संजय पराते ने सवाल किया, ” यदि सकल घरेलू उत्पादन में 8 फीसदी की बढ़ोतरी होने जा रही है तो उसका असर देश के आम बजट पर भी दिखना चाहिये. पिछले साल 17.94 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया था जिसे इस बार घटाकर 17.77 लाख करोड़ रुपये का कर दिया गया है.” उन्होंने कहा कि बजट को पिछले साल के कम से कम बराबर रखने के लिये इसमें 5 फीसदी की बढ़ोतरी होनी चाहिये थी जो नहीं हो रही है.

केन्द्र सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के नाम पर सीमा शुल्क तथा उत्पाद शुल्क को कम किया जा रहा है जिसका बुरा असर बजट पर पड़ेगा.

छत्तीसगढ़ के आम आदमी पार्टी के संयोजक संकेत ठाकुर ने इस बजट को ” कुछ का साथ, कुछ का विकास” बताया. उन्होंने कहा, ” छत्तीसगढ़ राज्य के लिये कुछ नहीं किया गया है. यह बजट पूरी तरह से कॉरर्पोरेट सेक्टर को समर्पित है.” संकेत ठाकुर ने कहा कि इस बजट में कृषि तथा ग्रामीण जनता के लिये कुछ नहीं है.

संकेत ठाकुर ने कहा, ” रेल बजट से माल भाड़ा बढ़ेगा तथा आम बजट में सर्विस टैक्स को 2 फीसदी बढ़ा दिया गया है. इससे कृषि पर विपरीत असर पड़ेगा.” आम आदमी पार्टी के छत्तीसगढ़ के संयोजक ने कहा. ” यूपीए सरकार के समय मनरेगा के लिये करीब 65 हजार करोड़ रुपये का बजट था उसकी तुलना में इस बजट में केवल 35 हजार करोड़ रुपयों का प्रावधान है. जाहिर है कि इससे गांवों में बेरोजगारी बढ़ेगी. जिससे ग्रामीणों की क्रय शक्ति कम होगी.”

शनिवार को देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा पेश बजट पर बिलासपुर के सुबीर ने कहा इससे महंगाई निश्चित तौर पर 2 फीसदी बढ़ जायेगी क्योंकि सर्विस टैक्स 2 फीसदी बढ़ा दिया जा रहा है. उन्होंने कहा पेट्रोल तथा डीजल के दाम अंतर्राष्ट्रीय बाजार में आधे के करीब हो गये हैं तस पर भई हमारे देश में आम जनता को उसका लाभ नहीं दिया जा रहा है.

उन्ही की तरह बिलासपुर के पास के तखतपुर के नीलोत्पल शुक्ला ने इसे महंगाई बढ़ाने वाला बजट करार दिया है.

छत्तीसगढञ के कृषि मामलों के जानकार प्रदीप शर्मा ने कहा कि देश को जरूरत है कि सीमांत किसानों को इन्फ्रास्ट्रक्चर उफलब्ध करवाया जाये अन्यथा उनके पास कृषि को छोड़कर मजदूरी करना पड़ेगा. इस बजट में मुझे ऐसा कुछ भी नहीं दिखाई देता जिससे देश के सीमांत किसानों की स्थिति सुधरे.

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