आया तीजा पोला, मिट्टी लेने लगी आकार

रायपुर । एजेंसी: छत्तीसगढ़ में त्यौहार आते ही मिट्टी विभिन्न प्रकार के आकार लेने लगती है. इन्हें आकार देते हैं यहां के कुम्हार मिट्टी को आकार देना ही इनके जीवन यापन का साधन है.

तीजा पोला पर्व पास आते ही पखवाड़े भर से राजधानी सहित सूबे के कुम्हारों की चक्कियां तेजी से घूमने लगी हैं और उनका पूरा परिवार नंदी बैल के साथ गणेश की मूर्तियां बनाने में जुट गया है. वहीं कुछ कुम्हारों की टोली तो दीपावली के दिए बनाने की भी तैयारी में लग गए हैं.


राजधानी से लगे बिरगांव इलाके के कुम्हार फिरतू राम ने गीली मिट्टी को अपनी चाक से आकार देते हुए बताया कि यह उनका पुश्तैनी व्यवसाय है जो छोड़ा भी नहीं जाता, जबकि मशीनी युग में फैंसी चीजों से प्रतिस्पर्धा उनके वश की नहीं है.

मिट्टी खोदकर लाने, सुखाने, कूटने, छानने, गूंथने के बाद चक्की पर चढ़ाकर उसे आकार देते हैं, फिर सुखाकर पकाते हैं. तब एक बैल का 15 रुपये, जाता का 10 रुपये और पोला का 5 रुपये मिल पाता है. दिए की कीमत तो मिट्टी के मोल होती है.

महादेवघाट मार्ग पर रायपुरा के गैंदराम कुम्हार ने कहा कि सीजन में पांच-छह हजार रुपये मिल गए तो बहुत हैं. गेंदराम के मुताबिक, उनका पूरा परिवार सिर्फ इसी के सहारे जीवन यापन करता है. सुहेला के जांगड़ा एवं हिरमी में 12-12 परिवार हैं, जिनके पास जमीन तो नहीं हैं, व्यवसाय के अलावा कृषि मजदूरी ही जीविका का साधन है.

गणेश चतुर्थी के मद्देनजर गांव-गांव में मूर्तिकारों की बाढ़ सी आ गई है. बेमेतरा, बलौदाबाजार, सुहेला, मोहरा, नवापारा, पड़कीडीह, भैंसा, जरौद सहित कई गांवों में दो से तीन स्थानों में आर्डर पर गणेश की मूर्तियां बनना जारी है. राजधानी रायपुर में भी शिल्पी अपनी कलाकृतियों को मूर्तरूप देने में लगे हैं.

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