नक्सली हिंसा पर मौन क्यो?

रायपुर | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने नक्सली हिंसा पर मानवधिकार संगठनों की मौन पर सवाल उठाये हैं. रायपुर में अपने निवास पर संपादकों से चाय पे चर्चा के समय मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि बस्तर के 40 लाख बाशिंदो को नक्सलियों ने बंधक बना कर रखा हुआ है. वहां पर बस्तर के लोगों के मानवधिकारों का रोज हनन हो रहा है उस पर मानवधिकार कार्यकर्ता खामोश क्यों हैं.

उन्होंने कहा कि नक्सलियों द्वारा की जा रही हिंसा पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस होनी चाहिये.


मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि वे मानवाधिकार कार्यकर्ता ही नहीं नक्सलियों से भी बातचीत करने को तैयार हैं लेकिन मुश्किल यह है कि नक्सलियों की ओर से बात कौन करे.

उन्होंने माओवादियों की पोलित ब्यूरो की ओर इशारा करते हुए कहा कि इनके ग्यारह नेता तो सामने आते नहीं हैं.

सुकमा के तत्कालीन कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन के अपहरण के बाद मध्यस्थों की एक कमेटी गठित हुई थी, लेकिन यह कमेटी भी कुछ समय बाद निष्क्रिय हो गई क्योंकि यह कमेटी इस स्थिति में नहीं थी कि आगे बात कर सके. उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में बस्तर में अभूतपूर्व बदलाव आया है. आज बस्तर के लोगों में विकास के लिए बेचैनी है.

एक सवाल के जवाब में रमन सिंह ने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि पत्रकार साजिश या ज्यादती का सामना न करना पड़े. छत्तीसगढ़ विशेष जनसुरक्षा अधिनियम के एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पत्रकारिक दायित्वों के निर्वहन के लिए नक्सलियों से मिलना कोई अपराध नहीं है.

उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित इलाकों में पिछले डेढ़ दशकों में जो विकास हुआ है उसकी तुलना इस अवधि में देश के किसी भी अन्य राज्यों में हुए विकास के कामों से करके देख लें, छत्तीसगढ़ बेहतर ही होगा.

नक्सली हिंसा
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में नक्सली हिंसा में पिछले दस सालों में 693 नागरिक तथा 867 सुरक्षा बलों के जवान मारे जा चुके हैं. यह संख्या देश के अन्य राज्यों में वामपंथी उग्रवाद के कारण मारे गये नागरिकों तथा सुरक्षा बलों की तुलना में सर्वाधिक है.

नागरिको की मौत
छत्तीसगढ़ में वर्ष 2005 में 52, 2006 में 189, 2007 में 95, 2008 में 35, 2009 में 87, 2010 में 72, 2011 में 39, 2012 में 26, 2013 में 48 तथा सितंबर 2014 में 25 तथा 2015 में 18 अक्टूबर तक 25 लोग लोग मारे गये. उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में माओवादी गतिविधियों के कारण नागरिकों को सबसे ज्यादा क्षति 2006 तथा 2007 में हुई थी जिसमें 2009 और 2010 में फिर से उभार देखा गया.

सुरक्षा बलों की मौत
अति वामपंथी हिंसा में सुरक्षा बलों को पिछले 10 वर्षों में हुई क्षति का आकड़ा कहता है कि छत्तीसगढ़ में वर्ष 2005 में 48, 2006 में 55, 2007 में 182, 2008 में 67, 2009 में 121, 2010 में 153, 2011 में 67, 2012 में 36, 2013 में 45 तथा सितंबर 2014 में 55 तथा 18 अक्टूबर 2015 तक 38 लोग मारे गये.

नक्सलियों की मौत
इसी तरह से इस दौरान सुरक्षा बलों के हाथों मारे गये माओवादियों की संख्या इस प्रकार से है. छत्तीसगढ़ में वर्ष 2005 में 26, 2006 में 117, 2007 में 73, 2008 में 66, 2009 में 137, 2010 में 102, 2011 में 70, 2012 में 46, 2013 में 35 तथा सितंबर 2014 में 33 तथा 18 अक्टूबर 2015 तक 25 अति वामपंथी मारे गये हैं.

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