EX NAXAL की शादी, पुलिस वाले घराती

रायपुर | समाचार डेस्क: नक्सल पीड़ित छत्तीसगढ़ में पूर्व नक्सली प्रेमी-प्रेमिका की शादी पर बवाल खड़ा हो गया है. छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने सवाल किया है कि क्या कोई सरकार इतनी गैर जिम्मेदार और सम्वेदनहीन कैसे हो सकती है. उल्लेखनीय है कि इसी नक्सली पर जीरम घाटी नर संहार में शामिल होने का आरोप है. उधर, पूर्व नक्सली पोडियामी-कोसी की शादी पर प्रदेश के मुखिया रमन सिंह ने सफाई दी है. उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुये कहा है कि राज्य के पुलिस महानिदेशक, बस्तर के आईजी और बस्तर के एसपी से पूरी रिपोर्ट मांगी, जिसके बाद यह स्पष्ट हो गया है कि दोनों माओवादी जीरम कांड में शामिल नहीं थे. इससे पहले 19 जनवरी को रायपुर में एक पत्रकार वार्ता में छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने आरोप लगाया था जीरम हमले में शामिल अपराधी को उसके स्वीकारोक्ति के बाद भी दंड देने के बजाय ईनाम दिया जा रहा. उसकी शादी करवाई गयी पूरा पुलिस अमला ऐसे खुशिया मना रहा था मानो उनने कोई किला फतह कर लिया हो. उसको सरकारी नौकरी दे दी गयी.

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों पूर्व नक्सली पोडियामी लक्ष्मण और कोसी मरकाम भव्य शादी में करीब पांच हजार लोग शामिल थे.


छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री रामसेवक पैंकरा ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “हमारे पास जो रिपोर्ट आई है, उसके अनुसार दोनों माओवादी जीरम घाटी कांड में शामिल नहीं थे. यह कांग्रेस की राजनीतिक बयानबाजी है.”

पिछले साल अप्रैल में पुलिस संरक्षण में ही पोडियामी लक्ष्मण ने बीबीसी से एक रिकॉर्डेड बातचीत में विस्तार से बताया था कि वह जीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं पर हमले के समय किस तरह माओवादियों के साथ थे और उनकी क्या भूमिका थी.

इसी तरह दो दिसंबर 2015 को जदगलपुर में मीडिया के सामने कोसी मरकाम समेत दो अन्य लोगों को इनामी माओवादियों का आत्मसमर्पण बता कर पेश किया गया था.

बस्तर के एसपी राजेंद्र नारायण दास ने तब दावा किया था, “कोसी मरकाम माओवादियों की प्लाटून कमांडर नंबर 26 की सदस्य रही है और उस पर 2 लाख रुपए का इनाम घोषित है.”

न्यूज एजेंसी आईएएनएस की 5 जनवरी, 2016 की खबरों के मुताबिक, “छत्तीसगढ़ के बस्तर में शहीद जवानों को अंतिम सलामी देने के लिए मातमी धुन बजाने वाली पुलिस की बैंड पार्टी पहली बार शादी समारोह के लिए धुन बजाएगी. समर्पण कर चुकी नक्सली कोसी की शादी 9 जनवरी को होगी. पुलिस घराती बनेगी और समर्पण कर चुके अन्य नक्सली बाराती की भूमिका में होंगे.”

एसपी के अनुसार, “कोसी मरकाम कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान माओवादियों द्वारा किए गए जीरम घाटी हमले में शामिल रही है. साथ ही वह टाहकवाड़ा मुठभेड़ में भी शामिल रही है, जिसमें 16 जवान मारे गए थे.”

बताया जाता है कि पुलिस कैम्प में एक दिन लक्ष्मण और कोसी की नजरें मिलीं और उसी दिन से दोनों के बीच प्रेम परवान चढ़ने लगा. इसकी जानकारी पुलिस के अधिकारियों को मिली. उन्होंने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए दोनों को परिणय-सूत्र में बांधने का फैसला लिया.

आईएएनएस की खबरों के अनुसार, “बस्तर के आईजी एस.आर.पी. कल्लूरी के मुताबिक, कोसी ने न केवल खुद समर्पण किया, बल्कि इलाके के दर्जनों नक्सलियों को भी मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया है. इसलिए उसके सुखद जीवन के लिए पुलिस पहल कर रही है. उसका कन्यादान भी पुलिस विभाग करेगा.”

बहरहाल, पूर्व नक्सली की पुलिस द्वारा करवाई शादी तथा इसमें पुलिस अफसरों के शामिल होने को कांग्रेस मुद्दा बना रही है तथा कांग्रेस के प्रवक्ता शैलेष नितिन त्रिवेदी का कहना है, “जिस मामले में अभी तक ढंग से आरोप पत्र तक पेश नहीं किए गए हैं, उस मामले के अभियुक्तों को पुलिस भला अपने स्तर पर मुक्त कैसे कर सकती है?”

शैलेष नितिन त्रिवेदी ने बीबीसी से कहा, “जीरम के हत्यारों की शादी का आयोजन कर के पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में सब कुछ मनमाने तरीक़े से चल रहा है. हम पूरे मामले को सड़क से लकर अदालत तक लेकर जाएंगे.”

टीएस सिंहदेव ने 19 जनवरी की पत्रकार वार्ता में कहा था, जीरम का हमला सामान्य वारदात नही था. दुर्दांत नर संहार था. निहत्थे मासूम और बेकसूर लोगों को घेर कर गोलियों से भून डाला गया था. इस हमले में प्रदेश की जनता ने अपने बड़े-बड़े नेताओ को खोया था. इस हमले में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से शामिल कोई भी व्यक्ति दया और रियायत का पात्र कभी नही हो सकता. इस हमले में बर्बरता और क्रूरता की सीमा को पार कर दिया गया था. स्व. दिनेश पटेल के चेहरे के ऊपर कुल्हाड़ी से वार किया गया. स्व. विद्याचरण शुक्ल जैसे 84 वर्षीय वृद्ध व्यक्ति को भी नही छोड़ा गया.

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