छत्तीसगढ़ में दलित बेटी निर्विरोध सरपंच

रतनपुर | उस्मान कुरैशी: एक तरफ जहां लोग चुनाव को रसूख ओर रूतबे के साथ जोड़कर लाखों रूपए पानी की तरह बहा देते है. वहीं ग्राम पंचायत मेलनाडीह में लोगों ने अपने गांव को आदर्श ग्राम बनाने पंच से लेकर सरपंच तक सभी प्रतिनिधियों को निर्विरोध चुना लिया है.

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों चुनावी सरगर्मिया तेज हो गई है. बुधवार को नामांकन दाखिले का अंतिम दिन था. जिसमें बड़ी संख्या में प्रत्याषियों ने चुनाव लड़ने अपने पर्चे दाखिल किए. बिलासपुर जिले के कोटा ब्लाक के नव निर्मित ग्राम पंचायत मेलनाडीह में सरपंच के पद पर दलित युवती सुश्री शारदा गढ़ेवाल निर्विरोध निर्वाचित हुई है. ये सब आरक्षण के चलते हुआ है. यहां सरपंच का पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है.

आदिवासी बाहुल्य इस पंचायत की आबादी करीब 12 सौ की है. जिसमें मतदाताओं की संख्या करीब 740 है. इसमें अनुसूचित जाति का पूरे पंचायत क्षेत्र में शारदा का ही एक मात्र परिवार निवास करता है. दो भाई और भाभी को मिलाकर इस वर्ग के चार ही मतदाता है. ग्रामीणों ने आपसी सहमति बनाकर गांव की दलित बेटी पर भरोसा जताया है. वहीं गांव बड़े बुजुर्गो सभी 11 वार्डो के पंच भी निर्विरोध चुन लिए है.

गांव के निर्वतमान सरपंच होरी लाल कहते है कि बड़ा गांव होने की वजह से हमारे क्षेत्र का विकास बाधित था. अब नया पंचायत बनने के बाद हमने गांव के विकास को गति देने आदर्ष ग्राम बनाने शासन की मंशा के अनुरूप अपने प्रतिनिधियों को निर्विरोध चुन लिया है. आदिवासी बाहुल्य गांव होने की वजह से शासन से काफी उम्मीदें है. गांव में बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए आई स्कूल की मांग काफी पुरानी है. जिसे पूरा कराने के प्रयास किए जाएंगे. शासन महिलाओं को आगे लाने में के प्रयास कर रही है. हमने भी गांव की बेटी पर भरोसा जताया है. उम्मीद करते हैं कि वो हमारी उम्मीदों पर खरी उतरेगी.

नव निर्वाचित सरपंच शारदा गड़ेवाल कहती है कि गांव के लोगों ने अपनी बेटी पर बड़ी जिम्मेदारी सौपी है. मै उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करूंगी. लोगों को सड़क पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराना मेरी प्राथमिकताओं में है. गांव के बड़े बुजुर्गो के सलाह से जनहित में सारे फैसले लिये जाएंगे.

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