छत्तीसगढ़ में जीवन की नसबंदी

बिलासपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के तखतपुर में शिविर में हुए नसबंदी के बाद 5 महिलाओं के मरने की खबर है. वहीं, करीब 35 अन्य महिलाओं के हालत बिगड़ने के कारण उन्हें बिलासपुर के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कर दिया गया है. खबरों के अनुसार 7 महिलाओं को बिलासपुर के अपोलो हास्पिटल्स में, 8 को सिम्स में तथा 21 को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने रायपुर मेडिकल कॉलेज से तीन चिकित्सकों की टीम बिलासपुर भेजी है. खबर है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर बुधवार को बिलासपुर बंद कराने जा रही है.

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के तखतपुर के पेंडारी में शनिवार को नसबंदी शिविर की आयोजन किया गया था. जिसमें करीब 85 महिलाओं का नसबंदी का ऑपरेशन किया गया था. शाम को सभी को दवा देकर छुट्टी दे दी गई थी. नसबंदी के 24 घंटे के भीतर ही 30 वर्षीय जानकी बाई की हालत बिगड़ने लगी थी जिसे बिलासपुर के जिला चिकित्सालय में भर्ती करा दिया गया था. सोमवार को सुबह उसकी मौत हो गई. उसके बाद चार और महिलाओँ के मरने की खबर है.


छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक कमलप्रीत सिंह ने कहा है कि लापरवाही पाये जाने पर उनके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी. उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार मरने वाले के निकट संबंधी को 2 लाख रुपयों का मुआवजा दिया जायेगा.

बालोद नेत्र शिविर के पीड़ितों को मुआवजा मिला
छत्तीसगढ़ सरकार ने बालोद में वर्ष 2011 में हुए नेत्र शिविर 46 पीड़ितों को 23 लाख रुपये का मुआवजा दिया है. इससे पहले छत्तीसगढ़ सरकार ने 46 पीड़ितों में से प्रत्येक को 50 हजार रुपये का मुआवजा दिया था. जिसे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने नाकाफी मानते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को आदेश दिया था कि प्रत्येक पीड़ितों को और 50-50 हजार रुपयों का मुआवजा दे. इस बात की जानकारी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सोमवार को जारी किये गये विज्ञप्पति के माध्यम से दी है.

गौरतलब है कि 29 सितंबर, 2011 को दुर्ग के बालोद में 93 लोगों के नेत्र का आपरेशन शिविर के माध्यम से किया गया था. जिसमें से 46 के आखों में संक्रमण की शिकायत मिली थी. उल्लेखनीय है कि इस आपरेशन के बाद 1 व्यक्ति की मौत हो गई थी तथा करीब 25 के आखों की रोशनी चली गई थी.

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