छत्तीसगढ़: 3 नक्सली मारे गये

रायपुर | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ में सोमवार को 3 बड़े नक्सली मारे गये. छत्तसीगढ़ के बस्तर में पुलिस तथा सुरक्षाबलों ने अलग-अलग घटनाओं में सीपीआई माओवादी के तीन हथियारबंद लोगों को एनकाउंटर में मार गिराया.

जिसमें से पहला एनकाउंटर सुबह नारायणपुर में हुआ. खबरों के अनुसार जिले की डीआरजी टीम ने पीपुल्स लिब्रेशन गुरिल्ला आर्मी के छठी कंपनी के कमांडर तिरुपति और लोकेश को बंसपाल के जंगल में एनकाउंटर के दौरान गोली मार दी.


नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीणा ने कहा कि पुलिस को सूचना मिली थी कि नक्सली छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स के जवानों पर हमला करने की फिराक में है. उस सूचना के बाद ही नारायणपुर पुलिस ने नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन शुरु कर दिया.

पुलिस अधीक्षक का कहना है कि घटनास्थल को देखकर लगता है कि कम से कम छः नक्सली मारे गये हैं लेकिन उनके साथी उन्हें साथ ले जाने में सफल रहें हैं. मौके से पुलिस ने भारी मात्रा में हथियार बरामद किये हैं.

सोमवार को दूसरी मुलाकात कोंडागांव जिले में हुई. जिसमें एक नक्सली को पुलिस ने मार गिराया. कोंडागांव के पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह ने कहा कि खोडेसानार और अखाली के जंगल में यह मुठभेड़ हुई थी.

पुलिस ने यहां पर से दो रायफल और भारी मात्रा में विस्पोटक बरामद किये हैं.

क्या कहते हैं आकड़े-
एक गैर सरकारी संगठन के अनुसार इस साल छत्तीसगढ़ में 18 सितंबर तक 90 नक्सली मारे गये हैं. यह संख्या देशभर में सबसे ज्यादा है. पूरे देश में इस साल 18 सितंबर तक कुल 161 नक्सली मारे गये हैं.

पिछले सालभर में छत्तीसगढ़ में कुल 45 नक्सली मारे गये थे जबकि देश के नक्सल प्रभावित 8 राज्यों में कुल 101 नक्सली मारे गये थे.

छत्तीसगढ़ में इस दौरान 30 नागरिक तथा सुरक्षाबलों के 26 जवान मारे गये हैं जो देश के नक्सल प्रभावित 8 राज्यों में सबसे ज्यादा है. इन 8 राज्यों में इस दौरान नक्सल हिंसा में कुल 91 नागरिक तथा सुरक्षाबलों के 54 जवान मारे गये हैं.

पिछले सालभर में छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा में 34 नागरिक तथा सुरक्षाबलों के 41 जवान मारे गये थे. देश के 8 नक्सल प्रभावित राज्यों में कुल 93 नागरिक तथा 57 सुरक्षाबलों के जवान मारे गये थे.

छत्तसीगढ़ में सुरक्षाबलों ने सबसे ज्यादा नक्सलियों को साल 2009 में मार गिराया था. उस साल राज्य में 137, उसके बाद साल 2006 में 117, उसके बाद साल 2010 में 102 मारे गये थे.

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