छग की बाड़ी की सब्जी, खाड़ी पहुंची

रायपुर | समाचार डेस्क: छत्तीसगढ़ की बाड़ी की सब्जी खाड़ी तक पहुंच गई है. इसके अलावा यह नेपाल, बांग्लादेश तथा पाकिस्तान में भी खूब बिक रही है. छत्तीसगढ़ में साल में करीब 5 हजार करोड़ रुपयों के सब्जी का उत्पादन होता है जहां से इसे विदेशों को भी निर्यात किया जाता है. उल्लेखनीय है कि जब साल 2000 में छत्तीसगढ़ बना था तब यहां साल में 11 लाख 46 हजार मीटरिक टन सब्जी का उत्पादन होता था जो साल 2011 आते-आते 42 लाख 40 हजार मीटरिक टन का हो गया. साल 2003-04 में छत्तीसगढ़ में उद्यानिकी फसलों का रकबा 1.17 लाख हेक्टेयर था जो साल 2014-15 में 7.25 लाख हेक्टेयर का हो गया.

छत्तीसगढ़ के लौकी, कुंदरू तथा हरी मिर्च की खाड़ी के देशों में भारी मांग है. छत्तीसगढ़ में उत्पादित शिमला मिर्च की देश के प्रमुख बाजारों में काफी मांग है.


सब्जी उत्पादन से जुड़े छत्तीसगढ़ के करीब 2 लाख किसानों ने यह कमाल कर दिखाया है. केवल पत्थलगांव तथा धमधा में ही 2 हजार करोड़ रुपयों के टमाटर का उत्पादन हो रहा है.

किसानों का मानना है की परंपरागत खेती के बजाय सब्जी की खेती में ज्यादा मुनाफा है. इस कारण किसान सब्जी की खेती करने लगे हैं.

जांजगीर जिले में धान गेंहू के बजाय सब्जी उत्पादन अधिक मुनाफे का ब्यवसाय बनते जा रहा है. इसका जीता जागता उदहारण है. जांजगीर जिले का सक्ती विकासखण्ड, जहां के किसान अब परंपरा गत खेती की जगह मौसमी सब्जी का उत्पादन कर आत्मनिर्भर हो रहे हैं.

जांजगीर जिले के टेमर, सिघनसरा, नवापारा, बोईरडीह, शिवरीनारायण, कनेटी गांव के बाड़ी या खेतों में अब धान के बजाय सब्जियां लहलहाती नजर आती हैं.

किसानों के मुताबिक सब्जी उत्पादन काफी लाभ का व्यवसाय होने के साथ कई फसली है हर सीजन में अलग अलग मौसमी हरी सब्जी की पैदावार कर काफी मुनाफा कमाया जा सकता है.

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