छत्तीसगढ़: मीना खलको केस पर तकरार

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ विधानसभा में बुधवार को मीना खलको हत्याकांड मामला सदन में गूंजा. कांग्रेस के भूपेश बघेल ने प्रश्नकाल में मीना खलको केस में सीआईडी जांच पर सवाल उठाया. विपक्ष ने पूछा- न्यायिक जांच रिपोर्ट में मीना खलको के साथ बलात्कार की पुष्टि हुई. इसके बाद भी अब तक थाना प्रभारी के खिलाफ बलात्कार का प्रकरण दर्ज क्यूँ नहीं किया गया है.

छत्तीसगढ़ विधानसभा में गृहमंत्री रामसेवक पैकरा ने कहा- प्रकरण जांच में है जांच के बाद दर्ज किया जायेगा धारा 376. गृहमंत्री पैकरा ने कहा- चांदो थाना के तत्कालीन थाना प्रभारी निकोदिम खेस्स और अन्य पुलिस कर्मियों के विरुद्ध धारा 302 के तहत 11 अप्रैल 2015 को सीआईडी थाना में अपराध दर्ज किया गया है.


गृहमंत्री ने कहा- बलात्कार कोई विषय नहीं है. हत्या का मामला दर्ज है. जांच के बाद बलात्कार की धारा भी लगाई जायेगी.

विधानसभा में विपक्षी कांग्रेस ने आरोप लगाया- आरोपी पुलिसकर्मी अब भी वर्दी में खुलेआम घूम रहे हैं. आरोपी जांच को प्रभावित कर सकते हैं. कांग्रेस ने आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया.

विपक्ष ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में आरोपियों को गिरफ्तार न करने तथा उन्हें निलंबित न करने पर हंगामा किया. विपक्ष ने मंत्री पर आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया.

गृहमंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन किया.

गौरतलब है कि 6 जुलाई 2011 को छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के ग्राम करचा में 17 वर्ष की किशोरी मीना खलखो का एनकाउंटर हुआ था. वो वनोपज संग्रह करती थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक मीना खलखो को दो गोलियां लगी थी, जो नजदीक से मारी गई थी. वहीं कोई भी पुलिस कर्मी घायल नहीं हुआ था.

लाश मिलने के बाद पुलिस ने दावा किया था कि वह नक्सली समर्थक थी और मुठभेड़ में मारी गई. मीना के गांव के लोगों और सरपंच ने इसका विरोध किया, उसे आम आदिवासी युवती बताते हुए इस मामले में जांच की मांग की थी.

आनन-फानन में सरकार ने मीना खलको के परिजनों को सहायता राशि आबंटित कर दी. इसके बाद सवाल उठने शुरू हुए कि यदि मीना नक्सली थी तो उसके परिजनों को सरकार की तरफ से आर्थिक मदद क्यों दी गई?

इसके बाद मामले की जांच के लिए आयोग का गठन किया गया जिसकी शुरुआती जांच के बाद एनकाउंटर के दौरान ड्यूटी पर रहे 18 पुलिस कर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया था. आयोग ने 7 अप्रैल 2015 को कैबिनेट को रिपोर्ट सौंपी जिसमें यह कहा गया कि मीना नक्सली नहीं थी और उसकी मौत पुलिस की गोली से हुई थी.

आयोग ने सीआईडी जांच की अनुशंसा की थी. उसके बाद सीआईडी ने 11 पुलिस कर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था.

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