लोकसभा में जाति प्रमाणपत्र का मुद्दा

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ के कांकेर के सांसद विक्रम उसेंडी ने लोकसभा में उच्चारण की त्रुटि के कारण 20 जातियों को उनका संवैधानिक हक न मिलने का मुद्दा शून्यकाल के दौरान उठाया. सांसद विक्रम उसेंडी ने कहा कि मात्रा की त्रुटि के कारण तथा राज्य सरकार के कर्मचारियों की त्रुटि के कारण उन लोगों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है जो जन्म से ही आदिवासी हैं.

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजाति में 42 जातियां अधिसूचित हैं. इनमें से लगभग 20 से ज्यादा जातियों में मात्रा, वर्तनी, उच्चारण संबंधी त्रुटि होने के कारण उक्त जाति के लोगों को जाति प्रमाणपत्र नहीं बन पाता.


गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शासन ने पठारी, पारधी, परहिया, सौंरा, सवरा, सकरा, भुईंयाभुया, भयया तथा भिंया, बिंझिया, धनुहार, धनुवार, रौतिया, सबरिया, खेरवार, खरवार, किसान, किसान नगेसिया एवं प्रधान, परगनिहा और अमनित को अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल करने की अनुशंसा केंद्र सरकार को भेजी है.

सांसद विक्रम उसेंडी ने लोकसभा में कहा कि शीघ्र ही इन जातियों को केन्द्रीय सूची में शामिल कर छत्तीसगढ़ को सूचना दी जाये.

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