छत्तीसगढ़: महिला बेड़ियों से मुक्त

बिलासपुर | समाचार डेस्क: आजादी के दिन एक महिला को बेड़ियों से मुक्ति मिल गई. छत्तीगढ़ के कवर्धा के लोहारा गांव में तीन बच्चों की मां को पिछले काफी सालों से बेड़ियों से जकड़कर रखा गया था. फैमिली कोर्ट कवर्धा के जज की पहलकदमी पर उस महिला को 15 अगस्त स्वतंत्रता के दिवस के दिन ही बेड़ियों से मुक्ति मिली.

मिली जानकारी के अनुसार इस महिला को मानसिक रोगी कहकर उसके हाथ तथा पैरों में जंजीरें बांध कर उसके परिजनों ने रखा था. आजादी के दिन महिला के हाथ का जंजीरे खोल दी गई तथा पैर में बंधी बेड़ियों को काटना पड़ा.

गौरतलब है कि कवर्धा फैमिली कोर्ट के जज विनोद कुजूर महीना भर पहले अपने परिवार के साथ कहीं जा रहे थे. उन्होंने रास्ते में देखा कि एक महिला को बेड़ियों से जकड़कर रखा गया है. उन्होंने छत्तीसगढ़ लीगल अथॉरिटी को उस महिला की फोटो भेजकर जानकारी दी.

गांव वालों से पता चला कि महिला मानसिक रूप से बीमार है तथा तोड़फोड़ करती है इसलिये उसके परिजनों ने उसे जंजीरों में जकड़कर रखा है.

महिला को 15 अगस्त के दिन बिलासपुर के सेंदरी स्थित मानसिक रोगी अस्पताल में लाया गया तथा उसकी बेड़ियांम काटी गई. चिकित्सा के लिये महिला को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है.

महिला के पति भगेला यादव का कहना है कि तीसरे बच्चें के जन्म के बाद उसकी मानसिक हालत बिगड़ने लगी थी. उसने एक कार का शीशा भी तोड़ दिया था. उसके बाद से उसे बेड़ियों में जकड़कर रखा जाता था.

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