मोदी सरकार का टेलीकाम घोटाला- कांग्रेस

नई दिल्ली | समाचार डेस्क: कांग्रेस ने मोदी सरकार पर 45 हजार करोड़ रुपये के टेलीकाम घोटाले का आरोप लगाया है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि छः मोबाइल कंपनियां भारती टेलीकाम, वोडाफोन, रिलायंस, आइडिया, एयरसेल तथा टाटा ने अपना मुनाफा 45 हजार करोड़ रुपये कम दिखाया है.

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कैग रिपोर्ट के हवाले से दावा किया है कि केन्द्र सरकार ने अपनी चहेती मोबाइल कंपनियों से 12 हजार 500 करोड़ का बकाया नहीं वसूला है. सुरजेवाला ने कहा कि कैग ने यह गड़बड़ी पकड़ी है परन्तु केन्द्र सरकार अपने चहेती कंपनियों को बचा रही है.

सुरजेवाला ने कहा कि 1999 में भाजपा द्वारा टेलीकॉम लाइसेंसिंग पॉलिसी लागू की गई जिसके तहत टेलीकॉम कंपनियों को स्पेक्ट्रम इस्तेमाल करने के चार्ज का हिस्सा सरकार के साथ शेयर करना था. केंद्र सरकार को सही हिस्सा मिले ये देखना कैग का काम है. कैग ने ये जांच शुरू की कि क्या टेलीकॉम कंपनियों ने अपनी इनकम कम दिखाई है.

सुरजेवाला ने कहा कि ऑडिट के दौरान निजी टेलीकॉम कंपनियों ने कहा कि उनके अकाउंट की जांच कैग नहीं कर सकती. कैग ने जांच में पाया है कि इन कंपनियों ने 2006 से 2010 तक अपनी कमाई 46 हजार 45 करोड़ कम बताई है. लेकिन मोदी सरकार ने फिर से ऑडिट कराने का फैसला किया है.

कैग की रिपोर्ट
कैग ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट में तीन अहम जानकारियां दीं हैं –

पहला, इन 6 कंपनियों ने 2006-07 से 2009-10 तक वास्तविक मुनाफे की तुलना में अपना मुनाफा 46,045 करोड़ कम बताया है.

दूसरा, कैग ने पाया कि सरकार को इन कंपनियों से 12,488 करोड़ रुपए लाइसेंस स्पेक्ट्रम चार्जेज और दूसरे चार्ज वसूलने थे. इसमें पेनल्टी और अन्य टैक्‍स शामिल नहीं थे. इसी फ़ॉर्मूले को अगर 2010-11 से लेकर 2015-16 तक लागू कर दें तो यह रकम 45 हजार करोड़ से अधिक बैठती है.

तीसरा, मार्च 2016 में रिपोर्ट आने के तत्काल बाद कदम उठाने के बजाय सरकार ने टेलीकॉम मिनिस्‍ट्री में दोबारा एक सीए से इन आंकड़ों का इवैल्युवेशन करवाने का फैसला लिया.

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि ‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’ का दावा करने वाली मोदी सरकार ने टेलीकाम कंपनियों को खाने दिया है.

वहीं केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस ने पलटवार करते हुये कहा है कि घोटाला यूपीए के कार्यकाल का है. जिसकी हम जांच करायेंगे.

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