राखी बंधवाने के बाद आदिवासी लड़कियों से जवानों ने की छेड़छाड़?

रायपुर | संवाददाताः दंतेवाड़ा के पालनार में राखी बंधवाने के बाद आदिवासी लड़कियों से बाथरुम में कथित सीआरपीएफ जवानों द्वारा छेड़छाड़ के आरोप के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया है.हालांकि पुलिस ने हॉस्टल की वार्डेन की शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की थी. लेकिन जब सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार ने इस मामले में हस्तक्षेप किया तो पुलिस ने धारा 354 के तहत मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही कार्रवाई होगी.

पुलिस के अनुसार दंतेवाड़ा के पालनार में एक निजी चैनल ने रक्षाबंधन पर एक कार्यक्रम रखा और लड़तियों के हास्टल में सीआरपीएफ के जवानों को बुलाया. राखी बंधवाने का कार्यक्रम संपन्न हो गया तो कुछ लड़कियां बाथरुम गईं और वहां कथित रुप से सीआरपीएफ के जवानों ने लड़कियों के साथ छेड़छाड़ की.


इस मामले में हास्टल की वार्डेन ने वरिष्ठ अधिकारियों से की. लेकिन मामले को दबा दिया. इसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार ने सोशल मीडिया में पूरे मामले पर एक पोस्ट लिखी, जिसके बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया.

क्या लिखा था हिमांशु कुमार ने अपनी पोस्ट में

छत्तीसगढ़ में एक ज़िला है दंतेवाडा,
वहाँ एक गाँव है पालनार,
पालनार में लड़कियों का एक स्कूल है,
इस स्कूल में हास्टल भी है,
करीब पांच सौ आदिवासी लडकियां वहाँ पढ़ती हैं,
पिछले सोमवार की बात है,
दंतेवाडा जिले के अपर कलेक्टर और कई अधिकारी इस स्कूल में गये,
इन लोगों ने यहाँ एक कार्यक्रम करने का प्लान बनाया था,
कार्यक्रम यह था कि इस स्कूल की लडकियां सीआरपीएफ के सिपाहियों को राखी बांधेंगी,
इन अधिकारीयों द्वारा सोमवार इकत्तीस जुलाई को दिन में सीआरपीएफ के करीब सौ सिपाहियों को लड़कियों के स्कूल में भीतर ले जाया गया,
लड़कियों से कहा गया कि सीआरपीएफ के सिपाहियों को राखी बांधो,
पांच सौ लडकियां सीआरपीएफ के सिपाहियों को राखी बाँधनें लगीं,
अधिकारीयों के आदेश पर इस कार्यक्रम की विडिओ बनाई जाने लगी,
सरकार यह दिखाना चाहती थी कि आदिवासी लडकियां सीआरपीएफ वालों को अपना रक्षक समझती हैं,
यह कार्यक्रम कल रक्षा बंधन के दिन छत्तीसगढ़ के टीवी चैनलों पर दिखाया जाएगा,
स्कूल में वीडिओ बनाने का यह यह कार्यक्रम काफी देर तक चलता रहा,
कार्यक्रम के बीच में कुछ लडकियां पेशाब करने के लिए शौचालय की तरफ गयीं,
पांच छह सीआरपीएफ के सिपाही भी चुपचाप लड़कियों के पीछे चले गए,
लड़कियों ने शौचालय के बाहर खड़े सीआरपीएफ के सिपाहियों का विरोध किया,
उन सीआरपीएफ के सिपाहियों ने लड़कियों को धमकाते हुए कहा कि हम तुम्हारी तलाशी लेने आये हैं,
तलाशी के नाम पर सीआरपीएफ के सिपाहियों ने तीन लड़कियों के स्तन बुरी तरह मसले,
एक लड़की शौचालय के भीतर ही थी, तीन सिपाही भी शौचालय में घुस गए,
पन्द्रह मिनिट तक तीनों सिपाही उस आदिवासी लडकी के साथ शौचालय के भीतर रहे,
बाहर खडी लड़कियों को दुसरे सिपाही डरा कर चुप करवा कर पकडे रहे,
इसके बाद लडकियां अपने कमरे में चली गयीं और सीआरपीएफ वाले अपने दल में शामिल हो गए,
कार्यक्रम पूरा होने के बाद सभी सिपाही और अधिकारी स्कूल से बाहर चले गए,
लडकियों ने अपने साथ हुए दुर्व्यवहार के बारे में रात को अपनी वार्डन द्रौपदी सिन्हा को बताया,
वार्डेन ने यह खबर एसपी और कलेक्टर तक पहुँचा दी,
अगले दिन कलेक्टर और एसपी पालनार पहुंचे,
लेकिन कलेक्टर और एसपी लड़कियों से मिलने स्कूल में नहीं आये,
बल्कि दोनों अधिकारियों ने सीआरपीएफ कैम्प में पीड़ित लड़कियों को बुलवाया,
हास्टल की वार्डन दो लड़कियों को लेकर सीआरपीएफ के कैम्प में गयी,
वहाँ कलेक्टर और एसपी ने दोनों पीड़ित लड़कियों को बुरी तरह धमकाया और किसी को इस घटना के बारे में बताने से मना कर दिया,
लेकिन पूरे पालनार गाँव में यह खबर फ़ैल गयी,
सोनी सोरी को गाँव वालों ने मदद के लिए बुलाया,
सोनी सोरी जब हास्टल में लड़कियों से मिलने गयी तो उन्होंने एक आश्चर्यजनक दृश्य देखा,
हास्टल की वार्डन चौकीदार की तरह स्कूल के गेट पर ताला डाल कर बैठी हुई थी,
गेट पर साथ में एक महिला पुलिस की सिपाही को भी नियुक्त करा गया था,
पुलिस और वार्डन किसी भी सामाजिक कार्यकर्ता या पत्रकार को अंदर आने से रोकने के लिए गेट पर पहरा दे रहे थे,
छुट्टी होने के बाद जब गाँव की लडकियां अपने घर आयीं तो सोनी सोरी ने उनसे घटना के बारे में पूछा,
लड़कियों ने पूरी बात बता दी,
इस मामले में सरकार ने कई गलतियां करी हैं,
लड़कियों के हास्टल के भीतर सीआरपीएफ के सिपाहियों का जाना गलत था,
लड़कियों ने जब अपने साथ हुए दुर्व्यवहार की शिकायत करी तो कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को उस शिकायत की जांच करनी चाहिए थी,
लेकिन कलेक्टर और एसपी ने मामले की जांच करवाने के बजाय मामले को दबाया और पीड़ितों को धमकाया,
इस तरह तो एसपी और कलेक्टर भी इस यौन अपराध के सह आरोपी बन गए हैं,
बालको के साथ यौन अपराध की यह घटना पोक्सो एक्ट में आती है,
इस एक्ट के तहत रिपोर्ट ना लिखने वाले अधिकारी को जेल में डालने का प्रावधान है,
मैं इस रिपोर्ट के द्वारा न्यायालय को इस अपराध की सूचना दे रहा हूँ,
न्यायालय इसका संज्ञान ले और इस मामले की जांच का आदेश दे,
यदि सरकार चाहे तो मेरी इस रिपोर्ट की सत्यता को चुनौती दे,
और छत्तीसगढ़ सरकार मुझे गिरफ्तार कर अदालत में पेश करे,
मैं अदालत में सभी सबूत और गवाह पेश कर दूंगा.

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